अंजलि शर्मा/कन्नौज : रेगिस्तान के मौसम में मलेरिया और कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। कोल्ड डायरिया से बच्चे को उल्टी दस्त और निमोनिया में बलगम वाली खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। अगर बच्चों को सही समय पर इलाज नहीं मिला तो ये खतरनाक साबित हो सकता है। जिला अस्पताल सीएमएस डॉ शक्ति बसु ने लोगों को रहने की सलाह दी है क्योंकि जिस तरह से लगातार तापमान में गिरावट आ रही है। ऐसे में जरा सी चुनौती इस गंभीर समस्या को दावत दे सकती है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु ने बताया कि ठंड का मौसम चल रहा है। इस सीजन में दो साल तक के बच्चों में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। यदि बच्चे को तीन से अधिक बार पानी के साथ मलत्याग हो रहा है तो यह डायरिया के लक्षण हैं, डायरिया के रोगी के शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो जाती है। समय पर बच्चों का इलाज नहीं होने से कोल्ड डायरिया से बच्चों की मौत भी हो सकती है। इसलिए बच्चों में इस प्रकार के लक्षण होने पर अविलंब नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
कोल्ड डायरिया क्या है?
सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु ने बताया कि कोल्ड डायरिया मूल रूप से ठंड में वायरस का हमला होता है। इसके अलावा ठंड में जोयारोट्रो, इंट्रोवायरस, क्लैपासेला और इकोलाई से परेशानी होती है। इन वायरस के प्रवेश के बाद बच्चों को पेचिस की शिकायत हो जाती है। इसके अलावा बच्चों को ठंड में पानी नहीं मिलता है क्योंकि उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है और वो ठंड में डायरिया की चपेट में आ जाते हैं।
कोल्ड डायरिया से बचाव के उपाय
सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु ने बताया कि समुद्र के मौसम में बच्चों को गुनगुना और तरल पदार्थ वाला खाना खिलाना चाहिए। डायरिया या दस्त पर मूंग की दाल के स्वाद के अलावा, डायरिया या दस्त का स्वाद लेना चाहिए। कोल्ड डायरिया में एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही बदलते मौसम में बाहरी तूफ़ान के साथ पूरे शरीर को ढालना पड़ता है। इस दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, खाना खाने से पहले साबुन से हाथ बदलना चाहिए, बाहरी समन्वय से काम लेना चाहिए। अगर इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लें।
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पहले प्रकाशित : 7 जनवरी, 2024, 20:18 IST
