रामकुमार नायक/रायपुरः मंज़िल ज़ायोनी तट है, वंडरलैंड वंडरलैंड में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से ही उड़ान होती है। ये पंक्तियां छत्तीसगढ़ के तीरंदाज सत्यभामा साहूकार पर भेजी जाती हैं। सत्यभामा आर्थिक रूप से बेहद ख़राब होने के बावजूद अपने परिवार के दम पर लक्ष्य को भेदते हुए आगे बढ़ रही हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 40वीं सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता चल रही है। इस प्रतियोगिता में सत्यभामा साहू छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। आइए जानते हैं अब तक कि आखिरी सफर की कहानी।
छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि कर रही हैं तीरंदाजी खिलाड़ी सत्यभामा साहू ने बताया कि महासमुंद जिले के बागबाड़े रहने वाली हैं, पिछले एक साल से रायपुर में रह रही हैं। पंडित यूनिवर्सल शुक्ला विश्वविद्यालय परिसर हायर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कला की कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। तीरंदाजी प्रतियोगिता लगभग चार साल तक चली। इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 40वीं सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता चल रही है। भाग लेने से पहले सत्यभामा राजस्थान में सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, गुजरात में हुई नेशनल चैंपियनशिप में भी अपना जौहर दिखाया गया है।
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पिता हैं ट्रक ड्राइवर
सत्यभामा ने बताया कि पिता मोतीराम साहू ट्रक ड्राइवर हैं, माता प्रेमिन बाई साहूकार हाउस वाइफ हैं। आगे बताया कि वह कुल चार बहनें हैं, बड़ी बहन कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं। 2 छोटी बहन स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। परिवार में कोई भी स्पोर्ट्स से लोकप्रिय नहीं है, लेकिन सत्यभामा ने स्पोर्ट्स में अपना फ्यूचर देखा और आज छत्तीसगढ़ में आयोजित 40वीं सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ की ओर से खेल रही हैं। जब सत्यभामा 7वीं कक्षा में थीं, तब उन्होंने बाल आश्रम बाग में तीरंदाजी होते हुए देखा, फिर सत्यभामा ने भी तीरंदाजी खेल का निर्णय लिया और आज तक तीरंदाजी के 3 राष्ट्रीय खेल खेले हैं। आगे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की चाहत हैं।
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पहले प्रकाशित : जनवरी 8, 2024, 13:33 IST
