सौरभ तिवारी/बिलासपुर. मकर संक्रांति के पर्व के सिर्फ कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस त्योहार के मुख्य आकर्षण पर बच्चों से लेकर बड़ों तक को पतंग का जिक्र करना बहुत शौक़ीन होता है। इसके लिए लोग पतंग और मांझे की खरीदारी भी करते हैं। अगर आप भी इस मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना चाहते हैं, तो आपको छत्तीसगढ़ की एक ऐसी जगह के बारे में बताया जा रहा है, जो पतंग के नाम से पूरे शहर में मशहूर है। बिलासपुर के गोल बाजार में महेश पतंग भंडार पूरे शहर में प्रसिद्ध है। इस दुकान को शहर की सबसे पुरानी पतंग की दुकान भी कहा जाता है।
यह दुकान 35 साल से भी ज्यादा पुरानी है। पिछले कई दशकों से शहर में किसी को भी पतंग खरीदनी होती है, तो महेश पतंग भंडार तक पहुँच जाता है। यहां पर पतंग को लेकर ट्रेंड भी बदल चुका है। इस दुकान के लीडर दिनेश साहू ने बताया कि पहले शहर में पतंगबाजी का चलन अधिक था, लेकिन समय के साथ इसमें गिरावट आती जा रही है। बच्चा अब बाहरी खेल जंप कम और मोबाइल में सबसे ज्यादा जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद एक बार फिर से पतंग उड़ाने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। वह पशु बाजार में पतंगें चमकती दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि आम दिनों में बिक्री कम होती है. तो वहीं अब संक्रांति आ रही है, तो आने वाले दिनों में और अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
पतंगों के दाम भी बढ़े
मकर संक्रांति को लेकर शहर का पतंग बाजार का त्योहार मनाया गया। ड्रीम्स साल जो पतंग पांच रुपये में बिकती थी, इस बार उसका दाम दोगुना हो गया। बाजार में तीन रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक की पतंग बिक रही है। पतंगबाजों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है, बच्चों से लेकर बड़े तक पतंग की डेट में पतंग की झलकियां पहुंच रही हैं। आजकल बाजार में प्लास्टिक, कागज और पैराशूट कपड़े से लेकर बनी किट उपलब्ध हैं। वहीं, शाइनिंग ली प्लास्टिक से बनी मिनी मैग्नेटिक पतंग भी आकर्षण का केंद्र हैं। आज से करीब पांच साल पहले बिलासपुर में पतंग महोत्सव का आयोजन हुआ था। जिसमें कैद के शौक़ीन पतंगबाज़ी करने पर रोक लगाते थे। लेकिन समुद्र तट पर शहर की कमी के कारण इसका आयोजन पूरी तरह से बंद हो गया है।
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पहले प्रकाशित : 8 जनवरी, 2024, 19:43 IST
