उत्तर
सीट स्कैन और एक्स-रे दोनों में रेड डायलॉग के माध्यम से शरीर की इमेजिंग की जाती है।
एमआरआई में रेड ऑयल का उपयोग नहीं किया जाता है, इसमें चुंबकीय तरंगें होती हैं।
सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे स्क्रीनिंग: ज्यादातर लोगों ने एक्स-रे, सिट स्कैन और एम-रिस्ट्री जांच के बारे में सुना होगा। किसी भी बीमारी का इलाज करने के दौरान डॉक्टर इस तरह की जांच करवाते हैं, ताकि सही समस्या का पता चल सके। हड्डी के टुकड़ों पर एक्स-रे प्लास्टर लगा होता है, जबकि मस्तिष्क में कोई समस्या नहीं होती, तो सीटी स्कैन या एम-रे प्लास्टर टूट जाता है। एमआरआई शरीर के अलग-अलग मानक भी होते हैं। आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर इन जांच को करवाते हैं। ये तीर्थयात्रियों के स्वप्न एक जैसे दिखते हैं, लेकिन सभी की तकनीकें अलग-अलग हैं। इन त्रि के बारे में आसान भाषा में समझें।
होपकिंस मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार एक्स-रे को रेडियोग्राफ़ भी कहा जाता है. यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदर रेडिएशन भेजा जाता है। हड्डी के दांत और सिलिकॉन वाली जगह से रेड सेक्शन आर-पार नहीं जाता है और इमेजिंग में इस जगह पर सफेद नजर आती हैं। जबकि शरीर के मुलायम टिशुज से रेड एसोसिएशन आर-पार हो गया है और उसकी छवि ग्रे या काली नजर आ रही है। यह इमेजिंग की सबसे तेज़ और आसान तकनीक है। यह महज़ कुछ मिनट में हो सकता है और इसे फर्स्ट लाइन इमेजिंग कहा जाता है। फ्रैक्चर के फ्रैक्चर, ज्वाइंट स्पेस, मिसअलाइनमेंट के लिए एक्स-रे करते हैं।
सीटी स्कैन को कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन कहा जाता है। इस स्कैन में शरीर के अंदर रेड पैच भेजा जाता है, जिसके जरिए शरीर के लेजर कंप्यूटर विधि से 360 डिग्री की छवि बनाई जाती है। यह एक्स-रे की तरह नहीं होता है और इसमें काफी खास तरीके से शरीर का स्कैन किया जाता है। सीटी स्कैन भी काफी तेजी से होता है और इसमें 1-2 मिनट का समय लगता है। क्वांटम कंडीशन सिटी में स्कैन बेहद घटिया है। ब्लड क्लॉट, बोन फ्रैक्चर, ब्रेन इंजरी की इमेजिंग के माध्यम से सीटी स्कैन किया जाता है। फ्रैक्चर के जो फ्रैक्चर एक्स-रे में डिटेक्ट नहीं हो पाते, वे फ्रैक्चर फ्रैक्चर स्कैन में पता चल सकते हैं।
एमआरआई को मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग कहा जाता है. इस तकनीक में पावरफुल मैग्नेट यानि चुंबक के माध्यम से रेडियो तरंग को पूरे शरीर में डाला जाता है। इस दौरान शरीर के प्रोटॉन प्रतिक्रिया करते हैं और शरीर के कणों के विस्तार से चित्र बनाये जाते हैं। इसमें सॉफ्ट टिशू, नर्व और ब्लड वेसेल्स की तस्वीर बन जाती है। एक्स-रे और सीटी स्कैन की तरह रेड ट्रीटमेंट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। एम् रिलीज़ करने में करीब 10 मिनट से कम समय लगता है। एम रिस्ट्रिक्ट इन स्पोर्ट्सजरी और मस्कुलोस्केल कंडिशंस में काम किया जाता है।
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पहले प्रकाशित : 8 जनवरी, 2024, 17:38 IST
