ईशा बिरोरिया/ऋषि.हमारी अस्त-व्यस्त तकनीक के कारण हमें कई सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वहीं अधिक खाने की चीजों से भी सेहत को नुकसान पहुंचता है।इसकी खोज के लिए हम लक्ष्य, जिम या योग का सहारा लेते हैं।वहीं इन सबके साथ ही योग्यताएं और एमबीए का सहारा भी बहुत जरूरी है। वहीं देवभूमि उत्तराखंड के जंगलों में एक पौधा भारी मात्रा में पाया जाता है, जड़ से लेकर फल तक का एक भाग औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर को विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं। यह पौधा है किलमोड़ा.
उत्तराखंड के जंगलों में मौजूद औषधीय गुणों से परिपूर्ण पौधा
उत्तराखंड के ऋषियों में स्थित पंडित ललित मोहन शर्मा क्षेत्र के वनस्पति विज्ञान के विशेषज्ञ प्रोफेसर दिनेश रावत ने स्थानीय 18 के साथ बातचीत में कहा कि किल्मोड़ा का पौधा एंटी डायबिटिक, एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी वाइरस और एंटी साइकोलॉजिकल गुणों से भरपूर है। इस उपाय को वनस्पति विज्ञान में बेसवेरिज बरबेरिस के नाम से और आम भाषा में किलमोड़ा (दारुहल्दी) के नाम से जाना जाता है। भारत में इसके 50 से अधिक गोदाम हैं। वहीं उत्तराखंड में इसके 28 से 30 टैटू पाए जाते हैं।
कई फूल साबित होते हैं
दीप्ति कहते हैं कि किल्मोड़ा का पौधा औषधीय मसाले का भंडार है। इसके तने, जड़वत, तने के छात्र और साथ ही इसके पत्ते कई के लिए प्रभावशाली साबित होते हैं। किल्मोडा को काटे या फिर जले में इसे एंटीसेप्टिक का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। वहीं जड़ोट को रात में पानी भिगाया जाता है और सुबह उस पानी को पीने से ब्लड खराब, कोलेस्ट्रॉल और शुगर कंट्रोल में रहता है। वहीं उनके टैने की स्टूडेंट का पेस्ट शेयर पर अंकित किया जाता है। साथ ही जड़ या फिर इसके तन को रात को पानी में भिगोकर सुबह पीने से दंत रोग और दृष्टि दोष में भी फायदा होता है।
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पहले प्रकाशित : 10 जनवरी 2024, 13:20 IST
