अनूप/कोरबाः अपने फॉरेस्ट में बैठी टीम से जरूरी चर्चा करते रेंज के उस वक्तर इंजीनियर हो गए, जब बाहर जरा स्ट्रेंजर सी ने आवाज दी। कॉटूहल वश उन्होंने खिड़की के बाहर सुंदर नज़ारे दौड़ाई, तो एक पेड़ पर बड़ा दृश्य था। पंचियों की एक ऐसी जोड़ी बैठी वहां बातें कर रही थी, जो यूं दिखाई देना काफी दुर्लभ है। ओपन हवा में गूंज यह कलरव किसी टिपिकल इंडियन फैमिली की तरह का व्यवहार पेश करने वाले इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की पहचान होती ही रेंज ने कैमरा मंगाया और उस रेयर नज़ारे को हमेशा के लिए कैद कर लिया।
बालको वन परिक्षेत्र कार्यालय के पीछे रविवार दोपहर करीब दो बजे इंडियनबिल को देखा गया। इस दुर्लभ वास्तुशिल्प को अपने कैमरों पर कैद करने वाले रेंज अधिकारी जयन्त सरकार ने बताया कि यह पक्षी मूल रूप से हिमालय क्षेत्र में स्थित है। यहां इसकी संख्या काफी कम है, लेकिन कोरबा क्षेत्र के जंगलों में इसे देखा जा सकता है। इस आर्किटेक्चर के फीचर में एक टिपिकल इंडियन फैमिली के व्यवहार की तुलना करने के लिए है।
इंडियन ग्रे हॉर्नबिल के नर पक्षी अपने परिवार के लिए भोजन या चारे की जुगत करते हैं, जबकि मडा घर संभालती है। जब ये दुकान पर मुर्दाघर होते हैं, तो नर हमेशा सुरक्षा के लिए चौकन्ना रहता है और मादा पीछे रहती है। जन्मकाल में, अंडे देने की बारी आती है, तो किसी पेड़ के कोटर में जरूरी जुगत होती है और मादा अंडे देने के बाद पूरी जगह जहां-तहां रुकती है। इस बीच मैदा के लिए चारे के अव्यवस्थित में भी नारकोटिक विज्ञान रहता है। हालाँकि, कभी-कभी अंडा या चूजे के संकट में होने पर, मैदा काफी आक्रामक हो जाती है, जो एक टिपिकल इंडियन फैमिली के व्यवहार की झलक दिखाती है।
यह भी पढ़ें: कहते हैं आम के आम और गुठली के दाम…एक साथ मछली और मछली पालन कर कमाता है 5 लाख का दावा
इंडियन हॉर्नबिल नाम कैसे पेड
इंडियन हॉर्नबिल की सामान्य विशेषताओं में शामिल हैं कि उदाहरण के रूप में। एक के पूरे शरीर पर ग्रे रंग का असर होता है और तीसरे पेट का हिस्सा ग्रे या फीके सफेद रंग का होता है। यूक्रेनी चोंच लंबी होती है और नीचे की ओर घूमती रहती है, अमूमन ऊपर वाली चोंच के ऊपर एक गंभीर शोभा होती है, जिसका अंग्रेजी नाम हॉर्नबिल (हॉर्न यानी यंग, बिल यानी चोंच) आया है। भारत में इसके 9 टैटू पाइयाँ मौजूद हैं। यह पक्षी बरगद, पीपल, और फलदार वृक्षों पर रहता है और इसका मुख्य भोजन फल, कीड़ा, मकोड़े, छिपकली, और चूहा होता है।
पेड़ की खोखल में घोंसला ऐसा
शाखा के विवरण में एक और दिलचस्प बात यह है कि इसका घर देखने में जितना सुंदर है, उससे कहीं अधिक उसका घर भी अनोखा है। नर एक बीट, कैरोटिड मिट्टी, और समुद्री पत्तियों के गूदे से किसी पेड़ की खोखल (कोटर) को पूरी तरह से एक तरह का सेटिन मिलता है, एक प्राकृतिक ऐक्स की तरह की राहत मिलती है। इस घर के अंदर, मादा बंदा अंडे की बिक्री होती है और नर उसे चारा लेकर देता है।
चुजे आबराम तक कहीं और रहता है। घर में सिर्फ एक छेद दिया जाता है, जो चूजे आने के बाद अपनी चोंच से खुरच-खुरच कर बाहर निकलता है। इन दुर्लभ पंचियों का घर भी बड़ा कमाल होता है। किसी बरगद, पीपल, या किसी अन्य अनोखे फलदार पेड़ के चिप्स तने या शाख के मसाले के टुकड़ों में, यह अपने खास घर सजाते हैं।
.
टैग: छत्तीसगढ़ खबर, कोरबा खबर, स्थानीय18
पहले प्रकाशित : 14 जनवरी 2024, 13:54 IST
