अनूप/कोरबाः- प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सनातन धर्म के सबसे बड़े आधार का लोग इंतजार कर रहे हैं। इस समय से जुड़ी मस्जिदें और उनमें आस्था रखने वाले लोगों के मन में उत्सुकता छलक रही है। इसी दौरान कोरबा के गीतांजलि भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रामनामी समाज के अनुयायियों को विभिन्न समाज प्रमुखों ने अक्षत, तिलक, वस्त्र एवं श्रीफल से विशेष सम्मान दिया। यहां लोगों ने रामनामी समाज को करीब से देखा और उनके बारे में जाना। मानव तन ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना कही गयी है। रामनामी संप्रदाय के भक्त इस देह में राम को बसाकर अपने प्राकृतिक रूप में चार चांद लगा रहे हैं। उनकी भक्ति श्रेष्ठ परंपरा के आगे हम सब नतमस्तक हैं।
रामनामी समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया
विद्या भारती के छत्तीसगढ़ प्रांत के अध्यक्ष पद पर आसीन सिंह ठाकुर ने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में रामनामी समाज का बसेरा है। उन्हें कोरबा में आयोजित इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के तहत कोरबा जिले के जैन, सिख, महाराष्ट्र मंडल, सिंधी, ब्राह्मण और राजपूत क्षेत्रीय समाज के अलावा उत्तराखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स और विभिन्न संगठन-संस्थाओं के लिए कार्य करने वाले विशिष्ट जन शामिल हुए। रामनामी समाज प्रभु श्रीराम की भक्ति को अपने-अपने तरीके से दर्शाता है। उनके पूरे शरीर पर राम के नाम का गोदना और भजन कीर्तन करना उनकी जीवन पद्धति का एक प्रमुख हिस्सा है, जो उन्हें सबसे अलग पहचान देता है।
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ईश्वर को समर्पित है
रामनामी समाज के सह सचिव पूंजाराम रामनामी ने बताया कि रामनामी समाज के लोगों के शरीर में राम-राम शब्द अंकित है जिसके कारण यह शाश्वत सत्य माना जाता है कि जन्म से लेकर मृत्यु के बाद भी पूरे देह को ईश्वर को समर्पित कर दिया जाता है। . जब हमारी मृत्यु होती है, तो ‘राम नाम सत्य है’ पंक्ति के साथ अंतिम संस्कार की ओर आगे बढ़ते हैं और राम नाम सत्य है उद्घोष के साथ ही पूरा शरीर राख में परिवर्तित हो जाता है। रामनामी समाज के लोग इस हद-मांस रूपी देह को प्रभु श्री राम की शरण मानते हैं और उनके रोम-रोम में राम के दर्शन होते हैं।
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पहले प्रकाशित : 14 जनवरी 2024, 14:23 IST
