एमएसपी से ज्यादा कीमत पाने का तरीका. किसानों को प्लांट से जगह की कीमत मिल सकती है। आश्चर्य बड़ा ही अजीब लग रहा है। जब सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स तय कर रखा है तो कैसे मिल सकता है। अगर ये कहा जाए कि इसमें स्वतंत्रताएं इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इन मार्टिएट्यूट (आईए इंजीनियर-पूसा) के किसानों की मदद कर रही है तो और भी ताज्जुब होगा, लेकिन ये सच है। लिंक से किसान पूसा की मदद से फसल का गुलदस्ता या इससे भी अधिक कीमत वसूल रहे हैं। आइए जानें उपाय-
भारतीय अनुसंधान कृषि परिषद के प्रधान वैज्ञानिक एवं बीजाणु पादप इकाई के प्रभारी डाॅ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि वे आईए के व्यापारियों के निर्माण और आय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। यह प्रयास इसी कड़ी में किया गया है। मिथक ने बताया कि आईए राइस के पास इतनी जमीन नहीं है कि वो किसानों को उचच गुणवत डेकोरेट वाले बीज उत्पादन में बढ़ोतरी कर सके। इसके लिए वो किसानों के साजो-सामान में बीज तैयार कर रहा है। आईआईआईटी का यह प्रयास किसानों की आय और निर्माता दोनों को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है।
ये है प्रकिया
डा. ज्ञानेंद्र सिंह सबसे पहले वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने देखा है कि किस फैज़ल की कौन सी तकनीक सबसे अच्छी है और उनके बीज के लिए कौन-कौन से इलाके सबसे अच्छे हैं। जहां पर सबसे ज्यादा उच्च गुणवत्ता वाला बीज पैदा किया जा सकता है। वैज्ञानिक इस पर रिसर्च करते हैं. इसके बाद वहां के किसानों से संपर्क किया जाता है। इसमें किसानों के चयन के कई आधार होते हैं. बीज तैयार करने में लागत किसान ही तय करता है, लेकिन गाइड आईए वैज्ञानिक के होते हैं। इस प्रक्रिया में आईए गीतकार के 100-120 किमी. समूह में रहने वाले किसानों का चयन किया जाता है, जिससे बीज तैयार होने के बाद केंद्र में रहने वाले किसानों का आवास खर्च न करना पड़े। कई किसान संयोजन में भी बीज दैवीय पादप शामिल हो सकते हैं, जिससे बीज दैवीय अनुसंधान में भाड़ा कम लागू हो सकता है।
ऐसे होता है भुगतान
सफल तैयारी के बाद किसान आईएएस रितीस्ट केन्द्र में ले जाता है। किसान को तत्काल कनेक्शन के अनुसार भुगतान किया जाता है। इसके बाद वैज्ञानिक अपनी जांच करते हैं। जिसमें औसत 8 प्रतिशत माल गुणवत, मैसाचुसेट्स के नामांकित व्यक्ति शामिल नहीं हैं। इसके लिए किसान और बीज की कीमत में बीज के रूप में बीज के रूप में तैयार किया जाता है। ऐसा होता है। आईए किसान को अंतर में कितने रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इस तरह किसान को थोक से अधिक लगत मिल जाता है।
किसान घर बैठे ले सकते हैं जानकारी
किसान पूसा के बीज एकांतपादन से सीधे 011 25842686 से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद के किसान विज्ञान केंद्र (केवीके) और एग्रीकल्चर टेक्निकल इनफॉर्मेशन केंद्र (एटिके) से संपर्क कर इसकी जानकारी ली जा सकती है।
लखनऊ, यूपी सहित इन उद्यमियों के किसान यहां संपर्क करें
आस-पास के शहरों में रहने वाले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (सांस्कृतिक समूह) में बीजगणित में कृषि अनुसंधान परिषद (सांस्कृतिक अनुसंधान परिषद) में ऑनलाइन संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा शाही प्रदेश में इज्जतनगर, नासिक, जयपुर, कानपुर, वाराणसी, दिल्ली में मोदीपुरम और मऊ, रांची में भोपाल, हरियाणा में करनाल और जगहें, राजस्थान में जोधपुर और जिला में पटना छत्तीसढ़ में रायपुर, झारखंड में रांची, झारखंड में रांची मेमोरियल और अलमोडा के टुकड़ियों में विक्रेता इसकी जानकारी ले सकते हैं।
बेरोजगारों के लोग ऐसे करें संपर्क
राजस्थान के किसान फार्मर व्हाट्सएप हेल हैशटैगलाइन 9560297502, पूसा हेल हैशटैगलाइन 011-25841670 / 25841039, 25842686 और पूसा एग्रीकॉम 1800-11-8989 टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रश्न https://www.iari.res.in/bms/faq/index.php पर भेजा जा सकता है।
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पहले प्रकाशित : 15 जनवरी 2024, 10:50 IST
