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आजमाया हुआ सीताफल-प्राकृतिक-आइसक्रीम-स्वाद-कर देगा दीवाना-जानिए-आइसक्रीम-बनाने से शुरू हो सकता है स्टार्टअप- News18 हिंदी


रामकुमार नायक/रायपुर. सीताफल एक ऐसा सीजन फल है, जो बहुत कम स्थान पर पाया जाता है। यह सीजन फल के साथ होता है, इसका स्वाद बहुत ही बेहतरीन होता है कि अगर आप इसे एक बार खाएंगे तो फिल्म की चाहत जरूर बढ़ाएं। अब तो इसका स्वाद आप हर दिन कोचिंग के रूप में ले सकते हैं। असल में, इन दिनों इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र सिंगार भाट कांकेर के सीताफल से बिजनेस बिजनेस की तैयारी की जा रही है। इससे सीताफल का उत्पादन करने वाले किसानों का अच्छा स्टॉक हो रहा है। साथ ही कई महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर के सह वैज्ञानिक उद्यानिकी पी. एस मरकाम ने बताया कि कांकेर जिले में सीताफल के किसानों के खेत और जंगल में प्राकृतिक रूप से बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। सीज़न में 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक मध्य सीताफल ताज़ा रूप में गैंग उपलब्ध रहते हैं। उस समय किसानों की ताजा स्थिति में सीताफल की बिक्री बहुत कम पाई गई। सीताफल की दुकान यानी पलेपिंघ और गोदाम डीप रेफ्रिजरेटर में 8 से 12 महीने की दुकान पर सुरक्षित रख सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर द्वारा सीताफल का निर्माण किया जा रहा है। इसका स्वाद मानों ताजी सीताफल जैसा है।

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सीताफल पूजन की विधि
सीताफल के निर्माण के लिए 2 किलो सीताफल का पेस्ट, 1 किलो क्रीम, 400 ग्राम मिश्रित दूध और 50 ग्राम मिल्क पाउडर की आवश्यकता होती है। इन सब को मथने के बाद कम से कम 3-6 घंटे डीप रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है। फिर इसे 60 ग्राम, 100 ग्राम की अलग-अलग मात्रा में 100 ग्राम की मात्रा में निकाला जाता है। डीप रेफ्रिजरेटर में आईएमएस स्टोर करना चाहिए। सीताफल की माता का स्वाद सबसे बढ़िया होता है. इसे बैंच कर एनोटेट भी किया जा सकता है। इस विधि को किसान और युवा एक व्यवसाय के रूप में भी अपना कर शुरू कर सकते हैं।

बाज़ार में भारी वस्तुएँ
पी. एस मार्कम ने आगे बताया कि बाजार में सीताफल कंपनी की बहुत कमी है। कृषि विज्ञान केंद्र एवं अनुसंधान केंद्र सिंगार भाट कांकेर के द्वारा प्रयोगशाला नहीं बनाई जा रही है। वैसे तो बाजार में सीताफल मैन्युफैक्चरिंग आसानी से मिल जाती है लेकिन इनमें से एक को तैयार करने की कोशिश की जाती है। सीताफल की शोकेस प्रदर्शनी में रखा जाता है जिससे 15 हजार रुपये तक का सामान आसानी से मिल जाता है।

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