रामकुमार नायक/रायपुर. रोग उपकरण क्षमता बढ़ाने के लिए आज यानी 25 जनवरी को रायपुर के आयुर्वेद महाविद्यालयों में बच्चों को सुवर्णप्राशन प्रयोगशालाएं दी जाएंगी। आयुर्वेद मंडल में हर पुष्य नक्षत्र की तिथि 16 वर्ष तक के बच्चों को सुवर्णप्राशन संस्कार दिया जाता है। नोट के अनुसार कुमारभृत्य बाल रोग विभाग में सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक सेवन कक्ष चलता है। यह दवा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, श्वसन संबंधी और अन्य उपकरणों से रक्षा करने के साथ ही एकाग्रता और स्मरण शक्ति को बढ़ाती है।
यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है। चिड़ियाघर आयुर्वेद संग्रहालय अभिलेख में हर पुष्य नक्षत्र तिथि में बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन का आयोजन किया जाता है। सुवर्णप्राशन हर माह की पुष्य नक्षत्र तिथि में 16 वर्ष तक के बच्चों को पिलाई जाने वाली औषधि है। इस वर्ष 25 जनवरी के साथ ही अन्य पुष्य नक्षत्र तिथियाँ 21 फरवरी, 19 मार्च, 16 अप्रैल, 13 मई, 10 जून, 8 जुलाई, 3 अगस्त, 30 अगस्त, 26 सितंबर, 24 अक्टूबर, 20 मार्च और 18 दिसंबर को भी सुवर्णप्राशन व्रत किया जा सकता है। .
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स्वर्ण भस्म का मिश्रण तैयार किया जाता है
सुवर्णप्राशन प्रक्रिया में बच्चों को घी, शहद और स्वर्ण भस्म का मिश्रण पिलाया जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने से न केवल प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलता है, बल्कि इससे बच्चों के शारीरिक एवं संतुलन विकास को भी बढ़ावा मिलता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी से इम्युनिटी बनी रहती है, जिसके कारण बच्चे बार-बार बीमार पड़ जाते हैं। आयुर्वेद में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए माता-पिता बच्चों को सुवर्णप्राशन की सलाह देते हैं।
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पहले प्रकाशित : 25 जनवरी 2024, 17:45 IST
