उत्तर
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए प्रतिरक्षा को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
जेनिटल हाइजिन का ध्यान उपचार साराइकल कैंसर से बचाव किया जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन समाचार: वित्त मंत्री ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अंतरिम बजट पेश किया। इसमें उन्होंने सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन को लेकर शुरुआत की है। वित्त मंत्री ने इस दौरान बजट में बताया कि सरकार सर्वाइकल कैंसर रोकथाम के लिए यूनिवर्सल में लाइब्रेरी ड्राइव चलाएगी। इसमें 9 से 14 साल की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन दी जाएगी, ताकि सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सके। डॉक्टर्स की सलाह तो देश में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। इसकी वजह से हर साल हजारों महिलाएं अपनी जान गंवा रही हैं। हालाँकि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है और सही आयु में टीकाकरण से इस घातक कैंसर का खतरा 98 वर्ष तक कम किया जा सकता है।
नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सिंगिंगोलॉजी ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सारिका गुप्ता के अनुसार सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 9 से 14 वर्ष की सभी लड़कियों को एचपीवी टीका लगाया जाना चाहिए। यह वैक्सीन कैंसर से 98 वर्ष तक की हो सकती है। वैक्सीन से कम उम्र की लड़कियों की इम्युनिटी तेजी से बढ़ती है और मैरोन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का खतरा कम होता है। सर्वाइकल कैंसर के 90 फीसदी मामले इसी वायरस की वजह से सामने आ रहे हैं. खास बात यह है कि 14 साल तक की लड़कियों के लिए इस वैक्सीन की सिर्फ एक खुराक काफी है। 15 या इससे अधिक उम्र की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन की 2 से 3 खुराकें दी जाती हैं। यह वैक्सीन 26 साल तक सबसे ज्यादा असर करती है और ज्यादातर उम्र की महिलाओं पर कम असर करती है।
डॉक्टर सारिका की राय तो एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के अलावा गले के कैंसर से बचाव में भी दावा साबित हो सकता है। आम तौर पर प्राइवेट हॉस्पिटल में एचपीवी वैक्सीन की एक खुराक की कीमत करीब 2000 रुपये है, जबकि आयातित वैक्सीन की कीमत 3500 रुपये तक है। बहस के अनुसार सर्वाइकल कैंसर का खतरा निरपेक्ष इम्युनिटी वाली महिलाओं में अधिक होता है। इसके अलावा अज़ाब संक्रमण, मल्टीपल सेक्सुअल बेंगलुरु, जेनिटल हाईजीन की कमी और कम उम्र में बच्चे वाली महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं। धूम्रपान करने से भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को छुट्टी के लिए समय-समय पर परामर्श करानी चाहिए। सर्वाइकल कैंसर का पता प्री-कैंसर स्टेज में भी लगाया जा सकता है और इसका इलाज करके इसे ठीक किया जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर के कुछ लक्षणों पर भी गौर करें, जिनमें शामिल होना जरूरी नहीं है। राधाकृष्णन के साथ यौन संबंध बनाना, ब्लीडिंग के बाद ब्लीडिंग होना, होटलों के बीच में महावारी होना, अटलांटिक महासागर में पानी आना या ब्लड रिलेशनशिप में रहना, रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना, सर्वाइकल कैंसर के लक्षण होते हैं। ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर चेकअप कराना चाहिए। सर्वाइकल कैंसर का पता प्रारंभिक चरण में लगाया जाए, तो सर्जरी के माध्यम से पता लगाया जा सकता है। जबकि एडवांस स्टेज में कीमोथेरेपी की जरूरत है। हर मरीज़ की कंडीशन के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है। सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए 14 साल तक की सभी लड़कियों को एचपीवी का टीका लगाया गया और जेनिटल हाइजिन का ध्यान दिया गया।
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टैग: बजट, ग्रीवा कैंसर, स्वास्थ्य, जीवन शैली
पहले प्रकाशित : 1 फरवरी, 2024, 13:57 IST
