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बसंत-पंचमी-दिन-बसंत-पंचमी-दिन-देवी-सरस्वती-आम-फूल-पूजा- News18 हिंदी


लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा:- हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो इस वर्ष 14 फरवरी 2024 दिन बुधवार को मनाया जाता है। बसंत पंचमी के विशेष दिन पर ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी और ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। जांजगीर जिला मुख्यालय के पुराने सीलन कॉलोनी में स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ शिव जी की भी पूजा होती है।

इस दिन मां सरस्वती जी को मुख्य रूप से आम का फूल चड़ाते हैं, जो छत्तीसगढ़ में आम का फूल भी खिलाते हैं। इसके अलावा आंख का फूल, बेलपत्र चढ़ाकर पूजा की जाती है। कहा जाता है कि आम के आटे को चढाने के बाद प्रसाद के रूप में थोड़ा-थोड़ा सभी को देना चाहिए और खुद भी खाना चाहिए। इस प्रसाद को ग्रहण करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है और पूरे साल भर वाणी भी बनी रहती है। मां सरस्वती जी की इस दिन पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन मां सरस्वती और शिव जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

मां सरस्वती की पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी-जल्दी स्नान करना चाहिए और जिस पानी से स्नान करना चाहिए, उसमें ऊपर थोड़ा सा तिल डालना चाहिए या तिल को पीसकर शरीर में लगाना चाहिए। नहाने के बाद इस दिन साफ-सुथरे पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। अगर ये रंग के कपड़े नहीं हैं, तो रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके पीले रंग का वस्त्रकर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र चित्र मां को माला पहनाएं, अक्षत, आम का फूल (अम माउर), पीले रंग की रोली, चंदन आदि चढ़ाएं और पूजा करें।

होली डांग गाड़ने की शुरुआत
पंडित बसंत महाराज ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन से होलिका दहन करने वाली लकड़ी की शुरुआत होती है। इस दिन जहां होलिका दहन होता है, वहां अण्डे का पेड़, हल्दी पेट, पूजा सुपाड़ी, नारियल में सभी नीड़ को जमीन में खोदकर शामिल किया जाता है और उसके बाद पूजा की जाती है। फिर धीरे-धीरे लकड़ी डाली जाती है और होलिका दहन के लिए तैयार किया जाता है।

बसंत ऋतु को कहते हैं ऋतुओं का राजा
हिंदू धर्म के अनुसार पूरे वर्ष में छह ऋतुओं का आगमन होता है, जिसमें बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, मौसमी ऋतु और शिशिर ऋतु शामिल होती है। सभी सीज़न में से सभी सीज़न में से सभी सीज़न का राजा कहा जाता है और बसंत सीज़न की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से ही होती है। इसलिए इस दिन को बसंत पंचमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो इस वर्ष बसंत पंचमी 14 फरवरी 2024 को मनाया जाएगा।

टैग: छत्तीसगढ़ खबर, स्थानीय18, सरस्वती पूजा



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