अनूप/कोरबाः- देश में आधुनिकता बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके साथ ही इसका विपरीत असर भी देखने को मिलता है। यह तो सभी जानते हैं कि आधुनिकता का प्रभाव सीधा परिंदों पर पड़ा और पंछियों की तादात में तेजी से कमी आई। मगर कोरबा के व्यवसायियों की समाप्ति के कारण अब भी सैकड़ों कबूतर बेफिक्री से शहर के बीच लोगों के साथ घण्टा समय बिताते हैं। सुबह-सुबह घूमने वाले लोग कबूतरों को दाना खिलाते हुए बातें करते हैं।
तस्वीर में मनमोहक झलक
ये मनमोहक तस्वीर कोरबा के मुख्य बाजार निहारिका इलाके की है। यहां हर रोज सैकड़ों कबूतर आते हैं. सामुहिक अवकाश और शोर-सराबे के बीच परिंदे निस्फिकर यहाँ वक्त बिताते हैं। व्यवसायियों के अलावा आम राहगीर भी रुककर इन प्यारे परिंदों को करीब से देखते हैं और संभवतः कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। कुछ लोग हर सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान दाना लेकर आते हैं।
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चरित्र पुण्य का काम
कुछ लोगों की जिंदगी में यह भी एक अहम काम बन गया है। सुबह-सुबह रिज़ारे सायर पर निकले लोग अपने साथ-साथ रिज़ा भर अनाज के दाने लेकर आते हैं। इन पक्षियों का भी डेनडेअर्स का इंतजार रहता है। कबूतरों को दाना डालने वाली महिला राजबाला ने बताया कि वे सुबह कबूतरों को दाना डालने के साथ-साथ पुण्य भी कमाते हैं। पशु-पक्षियों को दान या दान पुण्य का काम होता है।
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पहले प्रकाशित : 2 फरवरी, 2024, 17:32 IST
