ऑटिज्म के लक्षण: आमिर खान की मशहूर तस्वीर तारे ज़मीन पर है। इस फिल्म में पात्रा ईशान फोटोग्राफर को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि उन्हें ऑटिज़्म की बीमारी है। लेकिन उसे ऑटिज्म था. इसी तरह की फिल्म ‘बर्फी’ में जिस तरह के किरदार निभा रहे थे, वह भी ऑटिज्म से पीड़ित थे। ऑटिज़्म मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक व्यवहारिक स्थिति जिसमें बच्चा किसी अध्ययन से हिलने-मिलने में बहुत व्यस्त महसूस करता है। ऑटिज़्म की बीमारी में बच्चा हमेशा ड्र-सहमा रहता है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चा एक ही तरह की कुछ हरकतें करता रहता है। बच्चे को सामाजिक मेल-जोल से बेहद परेशानी होती है। मुश्किल तो यह है कि जब बच्चा बड़ा हो जाता है तब भी यही स्थिति रहती है। लेकिन शुरुआत में अगर ध्यान दिया जाए तो इससे आगे की राह बहुत आसान हो जाती है।
ऑटिज़्म की बीमारी क्या है?
मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिमाग में एक असामान्य विकार पैदा हो जाता है। इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रक डिसऑर्डर कहा जाता है। इसमें बच्चे को दूसरे से मिलने वाले व्यवहार, संपर्क और मेलजोल में अंत पैदा होता है। ऑटिज़्म में कई तरह के लक्षण एक साथ दिखते हैं इसलिए इसमें स्पेक्ट्रम शब्द को जोड़ा गया है। पहले बच्चों को होने वाले कई विकारों की तरह ऑटिज्म, एस्पर्जर सिंड्रोम, एलीलहुड डिसइंटिग्रेटिव डिसऑर्डर को अलग-अलग विकार माना जाता था लेकिन अब इन शिशुओं में ऑटिज्म डिसऑर्डर को अलग-अलग विकार कहा जाता है।
ऑटिज्म की शुरुआत कब से होती है
ऑटिज़्म की शुरुआत कुछ बच्चों में एक साल से ही होती है। लेकिन 18 से 24 महीने के बीच ऑटिज्म के स्पष्ट संकेत देखने को मिल रहे हैं। ऐसी स्थिति में इसी अवधि के दौरान अगर पहचान हो जाए तो आगे इस बीमारी पर बहुत हद तक फिजियोलॉजी पाई जा सकती है।
ऑटिज्म के लक्षण
- 1. अपनी धुनों में खोया रहना-ऑटिज्म की बीमारी में बच्चे अपनी धुनों में मस्त रहते हैं। एक ही जैसे काम करते हैं. अगर कोई नाम से भी बुलाता है तो इस पर प्रतिक्रिया नहीं देता। वह धुन में खोया रहता है।
2. सीखने में परेशानी-ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को दूसरे काम सीखने में बहुत दिक्कत होती है। लाख कोशिश के बावजूद भी उसे नई चीजें सीखने को नहीं मिलीं। लेकिन कुछ बच्चों में सीखने की क्षमता होती है।
3. आंख न मिलाने से कतराना-जब बच्चा एक साल का होता है तो वह दूसरी से आंख मिलाने से कतराता रहता है। हालाँकि अलग-अलग बच्चों में अलग-अलग तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं।
4. बच्चों में सामान्य से कम बौद्धकता हो सकती है। हालाँकि कुछ बच्चों में सामान्य से बहुत अधिक साक्षत्कार भी होता है। ऐसे बच्चे बहुत जल्दी सीख जाते हैं लेकिन इन्हें समझना जरूरी नहीं है क्योंकि दस्तावेजों से संपर्क करने में परेशानी होती है। - 5. सामान्य आपदा में परेशानी- कुछ बच्चों में सामान्य कार्य करने में भी परेशानी होती है। वह अपना डेली काम भी सही से नहीं कर पाता है।
- 6.रोबोट की तरह आवाज- कुछ बच्चों के बोलने में भी होती है परेशानी. वह रोबोट की आवाज की तरह बोलता है। ऐसी ही बोलती थी फिल्म स्नोकी में प्रियंका चोपड़ा।
इलाज कैसे किया जाता है
ऑटिज़्म का प्रतिशत प्रतिशत इलाज नहीं है लेकिन अगर शुरुआत में डॉक्टर के पास ले जाया जाए तो इस विकृति को बहुत हद तक ठीक किया जा सकता है। प्रीस्कूल से ही इस पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए कई आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता होती है। माता-पिता और परिवार को भी ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा स्कूल में अलग-अलग तरह से व्यवहार किया जाता है। डॉक्टर साइकलॉजिक थेरेपी देते हैं. कुछ भेदभाव भी किया जाता है. इसलिए अगर इन रहस्यों को अपने बच्चों में देखें तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
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पहले प्रकाशित : 7 फरवरी, 2024, 16:30 IST
