उत्तर
ब्रेन सामारोके के मिलिटरी पर एम एलेक्जेंडर और एलेक्जेंड्रा एलेक्जेंड्रा के टुकड़े टुकड़े कर रहे हैं।
अफ़ीज़िया यानि भाषण संगीत में असहाय अवसाद का इलाज अब भारतीय धुनों से होगा।
एम्स दिल्ली में संगीत थेरेपी: ऑल इन इंडिया सेनिट्युट ऑफ मेडिकल साइंसेज हमेशा से ही गंभीर से गंभीर बीमारियों के लिए बेहतरीन और इनोवेटिव इलाज ढूंढकर ढूंढता है। अब यहां ब्रेन केमिकल के सूखे का इलाज औषधियों से नहीं बल्कि संगीत से होगा। ब्रेन स्टैमरोक के बाद अपनी बोलने और समझने की क्षमता खो दी, ये मेहमान भारत की लोकप्रिय धुनें गुनगुना कर सीखेंगे। भारत में पहली बार एमक्यूजिक थेरेपी के लिए अफेजिया से बैचेन हो रही भारतीय मैडल तैयार की जा रही है और एम कोल के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर की मदद से इसे तैयार किया जा रहा है। यह थेरेपी और तकनीक कैसे काम करती है, आइए जानते हैं न्यूमेरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. दीप्ति विभा से…
क्या है अफ़ीज़िया बीमारी?
ब्रेन केयरोक आने के बाद 21 से 38 प्रतिशत लोगों में फीजिया की बीमारी हो गई। डॉ. दीप्ति का कहना है कि इसमें मरीज के दिमाग का काम हिसासा करना बंद कर देता है। इस हिसासे की वजह से ही सामान मित्र किसी भी बात को छोड़ देता है, बोलता है और अपनी फाइलिंग को खत्म कर देता है। अफ़ीज़िया के मरीज़ एक छोटा सा नाटक या वॉकमनी भी साथ नहीं हैं, ऐसे में इनमें फिर से बोले गए बोल सिखाने के लिए डॉयरेक्टिक थेरेपी आदि दी जाती हैं लेकिन प्रतीकात्मक रूप से इसके लिए एमक्यूज़िक थेरेपी बहुत लोकप्रिय है।
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सबसे खास है एमक्यूजिक थेरेपी?
डॉ. दीप्ति विभा का कहना है कि अफीजिया में ब्रेन का बायन हिसासा तो प्रभावित होता है, लेकिन दान्या हिसासा ईमानदार विनोदी रहता है। ब्रेन के दाँये हिसासे की वह कला संगीत से प्रभावित है, उसे गुणगुणाता है और याद दिलाती है। देखा गया है कि अफ़ीज़िया का जो मरीज़ एक श फिल्माद जैसा ‘पानी’ भी बोलकर नहीं मांग पाता, वह पूरा का पूरा गीत गुनगुना लेता है। इसलिए एमक्यूजिक म्यूजिक थेरेपी में मरीज के डेएंये हिसासे को सक्रिय करके उसे की शैली में बोलना और एक वॉकप्रेस करना सिखाया जाता है। इसके लिए बा एक तयशुदा फ्रेमवर्क होता है, रिसर्च होती है और फिर उस पर एप्लाई किया जाता है।
सबसे पहले इस थेरेपी में छोटे-छोटे शोज़ को संगीत की धुनों में बजाया जाता है, इसके बाद बड़े बड़े सेंटेंस यानी वाकयों को एमप्यूज़िक के साथ बजाया जाता है और संगीत की किसी भी धुन को बोला जाता है। उनके ब्रेन का डांस हिसासा काम कर रहा है तो वे इसे आसानी से समझ सकते हैं, उसे लय में एक एक्सप्रेस भी कर सकते हैं। इसके लिए कुछ राष्ट्रमंडल धुनें तय की जाती हैं, राजवंश वाक्पीठ होते हैं, उदाहरण के लिए रघुपत देव राघव राजा राम या ऐ मेरे वतन के लोग…। ये धुनें बांसुरी के बारे में भारतीय जानते हैं।
एमक्यूजिक थेरेपी कहाँ दी जाती है?
अभी तक एमक्यूजिक थेरेपी डॉक्टरी में उनकी समुद्र तट के एमक्यूजिक या धुनों के मधयोग्यम से दी जाती है। भारत में भी ये थेरेपी मशीन बनाई गई है लेकिन इनमें विदेशी एमक्यूजिक होता है तो भारतीय मरीज उसे न तो अच्छे से समझ पाते हैं और न ही खुद को उसके साथ जोड़ते हैं, इसलिए ये बहुत सफल नहीं हुए। इसलिए
आख़िर कर रहे हैं एम बंधन और बंधन समर्थक?
प्रोफेसरों का कहना है कि एम बैंड और लिबरल ग्रुप मेट्रिक्स मेट्रिक फंडेड न केवल अफीजिया के अध्ययन पर एक शीट बनाने जा रहे हैं, बल्कि सबसे पहले भारतीय संगीत और धुनों का आर्किटेक्चर तैयार करने जा रहे हैं। डॉल्फिन के एक डॉटर कर्नाटक संगीत में महारथी भी हैं और वे संगीत के दिग्गजों को जानते हैं, ऐसे में उनके साथ मिलकर कुछ सामान्य धुनों को तलाशा जा रहा है, इन्हें संग्रहालय में रखा जाएगा और फिर से मस्तिष्क पर शोध करके अध्ययन किया जाएगा।
डॉ. दीप्ति का कहना है कि एम एलबम में करीब 70 प्रतिशत पर्यटक भारतीय रेगिस्तान से आए हैं, ऐसे में वे यहां के मॉडल तैयार करते हैं और यहां के क्लासिक संगीत और धुनों को रिवाइव में रखा जा रहा है। साथ ही जैसे-जैसे मित्र मराठा के लिए आएंगे, उनके अंतिम संस्कार से भी उनकी पसंद को लेकर बातचीत की जाएगी।
कौन व्यक्ति संपर्क कर सकता है
न्यूमेरोलॉजी विभाग ने ब्रेन एमेरोक के बाद दोन की क्षमता खोए हुए तीर्थयात्रियों के फाइनल से अपील की है कि वे इस मदरसा में शामिल होने के लिए रोगी को एम दस्तावेज जरूर लेकर आएं। रोगी का निशुलक रूप से इलाज होगा। इसके लिए 8929466866 इस नंबर पर एम संपर्क में संपर्क भी कर सकते हैं। ब्रेन डायनामोक अफ़ीज़िया वाले 60 दोस्तों पर यह मदरटाडी होगी। सबसे पहले 30 लॉटरी को एमक्यूजिक थेरेपी, जबकि क्रिएटर 30 को रामाटेंडर का इलाज दिया जाएगा। इसके बाद हर 3 महीने में सभी में होने वाले बदलावों को नोट किया जाएगा। इस तरह जो रिजल्ट भी सामने आएगा।
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पहले प्रकाशित : 9 फरवरी, 2024, 14:58 IST
