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प्यार-सच-होता-पहली-नज़र-महत्वपूर्ण- News18 हिंदी


ओपीपी/सोपानकोरबा. आजकल युवा पीढ़ी लव एट फर्स्ट साइट में यकीन करती है, यानी पहली नजर में ही प्यार हो गया। ऐसा क्या होता है? आज कल युवाओं के प्यार और आकर्षण में फर्क नहीं समझ आता और बस आई लव यू बोल शेयर हैं। किसी के आकर्षण के कारण युवा पीढ़ी को लगता है कि उन्हें प्यार हो गया है। इस कारण से पढ़ें-लिखने की उम्र में लड़के-लड़कियां घर छोड़कर भाग रहे हैं। युवा पीढ़ी में आत्महत्या के मामले भी ऐसी कहानियां से जुड़ी होती हैं। समय के साथ यह प्रकृति गंभीर होती जा रही है। समाज में इस तरह की गंभीर प्रवृत्ति को देखते हुए हमने मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलिमा महापात्रा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी का आकर्षण प्यार की दृष्टि से भूल कर बैठता है और पढ़ने की उम्र में घर से दूर जाने के मामले सामने आते हैं।

उन्होंने बताया कि प्यार और आकर्षण दोनों बिल्कुल अलग हैं। आप सामने वाले को अभी तक ठीक से जान भी नहीं रहे हैं, तो यह कैसे संभव है कि आपसे प्यार हो गया है। ये सिर्फ एक आकर्षक हो सकता है. जो शुरू में प्यार फीलिंग के साथ होता है। आकर्षक कुछ दिनों का होता है और प्यार पूरी जिंदगी का। इनमें से जो युवा पीढ़ी पश्चिमी कल्चर से प्रभावित हो रही है। किसी का प्रति आकर्षित होना या मानव स्वभाव है। आकर्षण पहले भी हुआ था लेकिन तब युवा पीढ़ी को सामाजिक ज्ञान भी हुआ था। गलत कदम उठाने से पहले घर परिवार समाज के बारे में बताया गया। वर्तमान समय में देखा जाए तो बच्चों के हाथों में मोबाइल उनके लिए अत्यंत उपयोगी है। छोटी उम्र में जो उन्हें नहीं पता होना चाहिए, वह सब मोबाइल से जान लेते हैं और अपने बड़े-बड़े संकेत ले लेते हैं और अपने को ही सही समझ लेते हैं।

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आकर्षण है या प्यार ऐसे समझे
मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलिमा महापात्रा ने बताया कि बच्चों में उम्र के साथ मानसिक और शारीरिक रूप से अलग-अलग बदलाव होते हैं। साथ ही टीनएजर ग्रुप के बच्चों में भी बदलाव होते रहते हैं। उन्होंने बताया कि बात बस इतनी सी है कि बच्चों के माता-पिता उन्हें सही समय पर सही और गलत व्यवहार के बारे में नहीं सिखाते हैं, जिससे वे गलत रास्ते पर चलन में आ जाते हैं। ये समय रहता है. माता-पिता अपने बच्चों के प्यार से आकर्षक, प्यार, सही और गलत के बारे में समझाएँ। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को अच्छा सामाजिक ज्ञान भी जरूरी है। बच्चों को कुरेदें और उन्हें सामाजिक जीवन से परिचित कराएं।

बच्चे की मिसाल कैसे बनायें?
मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलिमा महापात्रा ने बताया कि अगर आपने अपने बच्चों को मोबाइल दिया है तो समय-समय पर नजर बनाए रखें कि आखिर वह मोबाइल में क्या कर रही है। बच्चों से बात करते रहते हैं कि आखिर उनके मन में क्या चल रहा है। बच्चा अगर जिद कर रहा है तो जरूरी नहीं कि उसका गैर जरूरी जिद पूरा हो जाए। गलती करने पर बच्चों के दोस्त बैठ कर प्यार से समझाते हैं। अगर बच्चों के माता-पिता की बात नहीं सुनी जा रही है तो सामूहिक बच्चों के प्रतिभाशाली कलाकार से मिलें।

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