सौरभ तिवारी/बिलासपुरः- अगर मन सच्चा हो और सात्विक मन से कोई काम करना हो, तो आप कहीं भी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में रहने वाली अभिताशा ने इस बात का उदाहरण पेश किया है। बिलासपुर के समुद्र तट-अरपा नदी बहती है, जहां जलकुंभी की समस्या लंबे समय से है। इसके लिए निगम द्वारा भी कई प्रयास किए गए, लेकिन करोड़ों की सफाई और मशीन खरीदने के बाद भी इसका समाधान नहीं निकला। वहीं जलकुंभी की इस समस्या से शहरी निवासियों और नदी के खराब पानी से भी चिंता व्यक्त की गई। लेकिन 9वें के इलेक्ट्रानिक अभिताशा ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला, जिससे उनका प्रभुत्व देश-दुनिया में हो रहा है।
जलकुंभी पर जांच
9वीं शताब्दी के स्मारक अभिताशा ने बताया कि शहर के तालाबों और नदियों में जलकुंभी की समस्या काफी गंभीर है। जिसके बाद उन्होंने जलकुंभी पर अध्ययन और शोध करना शुरू किया। अभित्षा ने अपने शोध में पाया कि समाप्त करने के लिए प्रभावकारी साधन मौजूद नहीं है। वर्तमान में इसके चमत्कार में दो ही तरीके अपनाए जा रहे हैं। एक केमिकल विधि है, लेकिन केमिकल से पानी में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है और अन्य सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। दूसरी तरफ मशीन सेव की लागत काफी अधिक है। अभित्षा ने अपने अध्ययन में पाया कि जलकुंभी से ‘नियोचेतिना इचोर्निया’ नाम के कीट काफी प्रभावशाली हो सकते हैं। यह कीट जलकुंभी खा कर जीवित रहते हैं और यह तेजी से फैलते हैं। वैक्सिन मेडिसिन से इसका उपयोग कर जलकुंभी को लंबे समय तक पठने से लिया जा सकता है।
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छोटी-सी जगह में प्रयोग
आभा अभित्शा ने एक छोटी सी जगह पर प्रयोग करके देखा, जहां उन्हें सफलता मिली। जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने अपने प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्टेनेबल एजुकेशन में सबमिट किया, जहां उनके प्रोजेक्ट को तीसरा स्थान मिला। अब इनमें से एक अनुसंधान और पर्यावरण के प्रति अभिन्न जुड़ाव का महत्व देश-दुनिया में हो रही है। वहीं अब प्रशासन को जरूरत है कि अभिताशा के इस शोध पर ध्यान दिया जाए, ताकि इसके उपयोग से जलकुंभी की समस्या का समाधान हो सके।
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पहले प्रकाशित : 24 फरवरी, 2024, 12:32 IST
