विशाल झा/गाजियाबाद। अज़ाब (ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम बताया गया है कि लोग खतरनाक में आ जाते हैं। शुरुआत में इस बीमारी का पता नहीं चलता और समय के साथ ये समस्या बढ़ती जाती है। खास बात यह है कि इस जन्मजात बीमारी के लक्षण किसी भी अन्य बीमारी के जैसे ही होते हैं जो पता नहीं चल पाते और बढ़ते हैं। इसलिए ये जरूरी है कि शुरुआत में ही आप इसके रहस्य के बारे में जान लें और हमेशा इस बीमारी को लेकर सतर्क रहें।
वयोवृद्ध संक्रमण डिजीज विशेषज्ञ डॉक्टर रुआब अब्बासी की कहानी है कि एचआईवी वायरस (एचआईवी वायरस) तीन चरणों में होता है। जिसमें सबसे पहले प्राथमिक चरण (एचआईवी का प्राथमिक चरण) के अंतर्गत कुछ प्रारंभिक लक्षण नजर आते हैं। कई लोगों को पहली बार 1-4 सप्ताह बाद फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये अक्सर केवल एक या दो सप्ताह तक ही टिकट होते हैं। फिर लक्षण अलग-अलग नजर आते हैं और व्यक्ति के शरीर के अलग-अलग-अलग कद-काठी में अलग-अलग लक्षण महसूस होते हैं।
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एचआईवी होने का पहला संकेत
एचआईवी से पीड़ित कुछ लोगों में वायरस के शरीर में प्रवेश करने के 2 से 4 सप्ताह के भीतर फ्लू जैसी बीमारी विकसित हो जाती है। जिसमें बुखार, सिरदर्द, अस्थमा, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर दाने, गले में खराश, मुंह में छाले आदि लक्षण शामिल हैं।
ऐसे होती है एचआईवी की शुरुआत
अधिकांश लोगों को पता नहीं है कि वे अनिवासी से कब्ज़ा करवाते हैं। लेकिन 2 से 4 हफ्ते के अंदर ही लक्षण सामने आ जाते हैं. ऐसा तब होता है जब आपके शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली का सामना करना पड़ता है। इसे एक न्यूट्रल वायरल सिंड्रोम या प्राथमिक अनैच्छिक संक्रमण कहा जाता है। इस दौरान कोई भी बीमारी आपके शरीर में लंबे समय तक बनी रहती है। इन्फेक्टेड एनाप्रोटेक्टेड शारीरिक संबंध, इन्फेक्टेड ब्लड इन्फेक्टेड इन्फेक्टेड, इन्फेक्टेड सिरिंजसे डिटेक्शन, स्मोकचैन लिक्विड और मां से बच्चे को भी हो सकता है। ये कोई हवा में रेलवे वाली बीमारी नहीं है.
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पहले प्रकाशित : 26 फरवरी, 2024, 13:52 IST
