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असली में नहीं चाहिए दवाई, अगर खाएंगे इस चीज से बनाएं दवाई, जानें असली


आखिरी बड़कुल/दमोह: मप्र के बेंगलुरु इलाके में वैसे तो ये सफेद तिल की खेती बहुत ही कम होती है, लेकिन ये तिल हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत चमत्कारी है, बाकी तासीर गर्म होती है.जिसका सेवन आम तौर पर सबसे ज्यादा किया जाता है.सर्दियों के मौसम में तिल के लोध, तिल की स्ट्रिप्स और गजक को लोग बहुत चाव से खाना पसंद करते हैं। सफेद और भूरे तिल का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी होता है। इसमें बहुत से पोषक तत्वों का मिश्रण होता है। इसमें तिल प्रोटीन, कैल्शियम, मैगनीशियम, आयरन और कॉपर जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा कि हमारे यहां सफेद तिल के बारे में आयुर्वेद में ये कफ और वात का मतलब है, और पित्त की वृद्धि करता है। अब इस समय हम देखते हैं, कि ठंड में ठंड है, तो पित्त दोष के कारण शरीर में गर्मी बनी रहेगी. सबसे ज्यादा देखने में आता है स्वांस रेजीडेंट्स। इस समय ब्रोंकाइटिस,लगातार कफ की समस्या तो लेकर आता है जो बहुत ही जादुई साबित होता है। हमारा स्वांस नली को स्वस्थ्य प्रदान करता है जो बालों को पोषण देता है।

बढ़ते हुए ट्यूमर पर लगा रोक, ऐसा है ये सफेद दाना
ठंड के समय रूखी त्वचा हो जाने पर तिल के तेल का उपयोग करें। इसके इस्तेमाल से चेहरे पर मौजूदा दाग, धब्बे मिटेंगे और ग्लो आएगा साथ ही इसका सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं। इसमें जो कैंसर विरोध गुण होते हैं वो कैंसर, ट्यूमर को बढ़ने से रोक सकते हैं। हृदय रोग में यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता नहीं है बल्कि इसकी अधिक मात्रा का सेवन नहीं करता है क्योंकि अधिक मात्रा में इसके सेवन से वजन बढ़ सकता है। जिसका वजन नहीं बढ़ रहा है तो वह तिल का सेवन करे तो उसे जरूर फायदा होगा।

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