झुंझुनू. जिले के बीसाऊ बस्ती में बनने वाली तिलंगनी सेंथोली मिठाई देश की सबसे ऐसी मिठाई है जो सिर्फ यही दिखती है। इस मिठाई को तैयार करने में ना तो तेल की जरूरत होती है और ना ही घी की. ऐसी है मान्यता कि मां लक्ष्मी जी को इस मिठाई का भोग लगाना जरूरी है। इसके बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शेखावाटी क्षेत्र में वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां के सभी मोटो पर यह उपलब्ध रहता है।
इसके लिए पुरालेख पुस्तिकाएं हैं। इसकी खासियत यह भी है कि यह मिठाई पूरे साल सिर्फ क्रिसमस के दौरान तैयार की जाती है। आई एस बिज़नेस नवरात्र से लेकर दीपावली तक ही होता है। सिद्धांत यह है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय सैंथोली का भोग लगाना मां को पसंद आता है। शेखावाटी क्षेत्र में इस मिठाई के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है। इस मिठाई के स्वाद को चखने के लिए प्रवासी और विदेश में बैठे कामगार भी बेस सीजन का इंतजार करते हैं। प्रवासी व्यक्ति ऑर्डर विक्रयकर्ता इस उत्पाद को सूचीबद्ध करते हैं
शेखावाटी क्षेत्र में वर्षों से मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह निर्माता नहीं है. पुराने जमाने के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह हर बस्ती में सर्व-सुलभ और घटिया थी। इसलिए लोग इस मिठाई से मां लक्ष्मी की पूजा करते थे। वह परंपरा आज भी शुरू हो रही है। वर्तमान में लक्ष्मी पूजन में कई तरह की मिठाईयां काम में ली जाती थीं, लेकिन इसके बावजूद सेंठोली का भोग लगाना जरूरी माना जाता है। इसलिए सालों से यह मिठाई बिस्कुट में बनाई जा रही है।
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यहां से शेखावाटी के विभिन्न मॉलों में सेंथोली को बनाया जाता है, जिसमें बड़ी कारीगरी की जाती है। पहले चीनी रवदार चाशनी तैयार की जाती है। फिर चाशनी को साफा व तेल लागी, स्टॉकहोम शिला पर, हाथो से फातहा लगानी का सामान मिलता है। ऐसा ही एक दीवार में लगी हुई लोहे की छड़ों पर लंबे-लंबे सफेद सिक्के बनाए गए हैं। दो बच्चों सेंथोली को बनाने में करीब एक घंटे का समय लगता है.
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पहले प्रकाशित : 30 अक्टूबर, 2023, 10:58 IST
