सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर: ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत सुबह चाय की चुस्की के साथ होती है। कई लोगों को तो चाय की इतनी तलब होती है कि उन्हें हर दो-दो घंटे में चाय का प्याला चाहिए होता है। लेकिन पप्पी की दुकानों में पुरानी चाय की दुकान है। यहां जो एक बार पी जाता है, उसका उपयोग यह तलब लगाना बिल्कुल तय है।
चाय की दुकान वाले पंकज कुमार ने बताया कि यह दुकान उनके पिता द्वारिका प्रसाद ने शुरू की थी। उनके पिता ओसिओफ़ फैक्ट्री में नौकरी करते थे। नौकरी छूटने के बाद द्वारिका प्रसाद ने खिरनी बाग इलाके में चाय की दुकान शुरू की। 39 साल पहले जब द्वारिका प्रसाद ने चाय की दुकान की शुरुआत की थी। उस वक्त चाय की कीमत 25 पैसे हुई थी और आज चाय की कीमत लगभग 10 पैसे हो गयी है। उसके बावजूद भी लोग आज भी इस चाय को पीने के लिए यहां आते हैं।
ऐसी क्या है इस खास चाय में
पप्पी की चाय जो कि प्योर दूध के साथ बनाई जाती है। इस चाय में पानी नहीं बनता है. यह चाय इतनी स्वादिष्ट होती है कि पैरवी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और आश्रम के अवकाश के साथ-साथ यहाँ आश्रम में आने वाले लोग भी ज्ञान चाय का चुस्की लेते हैं।
सैकड़ों लोग पीते हैं पप्पी की चाय
पप्पी की चाय की दुकान जो सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक खुली रहती है। दुकान के मालिक पंकज कुमार गुप्ता का कहना है कि उनके यहां रोजाना करीब 700 लोग चाय पीने आते हैं और जो ग्राहक एक बार यहां चाय पीने आते हैं। वह अगली बार फिर जरूर आएगी। पप्पी की चाय की दुकान पर रोजाना करीब 100 लीटर दूध के दाम मिलते हैं। इतना ही नहीं इसके साथ-साथ 4 किलो चीनी और 3 किलो चाय की पत्ती की रोज़ मिलती है। पप्पी के यहां से लोग चाय करवा पैक भी ले जाते हैं।
चाय बनाने का प्रॉसेस
पप्पी की इस चाय को बनाने के लिए सबसे पहले दूध का फ्री पैन लेना पड़ता है। दूध को प्रभाव गर्म करने के बाद स्वाद के अनुसार चीनी और चाय की पत्ती मिलती है। फिर इस चाय को 5 मिनट तक आधा-अधूरा स्टॉक में डाल दिया जाता है. बाद में जब चाय खौलने लगी तो फिर गुड कर में कप निकाल लिया गया और चाय ग्राहक को दे दी गई।
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पहले प्रकाशित : 30 अक्टूबर, 2023, 15:25 IST
