करवा चौथ 2023: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवाचौथ का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 01 नवंबर दिन रविवार को पड़ रहा है। हिंदू धर्म में करवाचौथ व्रत का बड़ा महत्व है। धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना से निर्जला व्रत करती हैं। इसके बाद रात को चंद्र देव को अर्घ्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोला जाता है। हालांकि, इस दौरान लोगों के जहां में ऐसे सवाल होते हैं, ज्यादातर लोग अंजान होते हैं। करवा चौथ का व्रत कैसे रखें? करवे में क्या भरना चाहिए? छलनी से पति को क्यों निहारते हैं? कौन सी दिशा अधिक शुभ है? ऐसे ही करवा चौथ से जुड़े दिलचस्प मसालों का जवाब दे रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
करवा चौथ की तैयारी कैसे करनी चाहिए?
करवा चौथ की तैयारी के लिए सबसे पहले थाली में एक बर्तन से दीपक बनवाना चाहिए। उस दीपक में रुई की बात का होना अत्यंत आवश्यक है। इसमें मिट्टी का करवा भी जरूर शामिल है। इसके अलावा, इसमें एक जल का कलश भी रखा गया है, जिससे आप चंद्रमा को अर्घ्य देंगे। साथ ही छलनी का होना भी जरूरी है, जिससे आप चांद के दर्शन कर सकते हैं।
करवे में क्या भरना चाहिए
कुछ लोग करवा में बर्तन और उसके अपार्टमेंट में शक्र को भरते हैं। फिर करवा पर 13 रोली की बिंदी को हाथ में लेकर चावल के दाने लेकर करवा चौथ की कथा बताई जाती है। फिर कथा को सुनने के बाद करवा पर हाथ कुकरकर महिलाएं अपनी सास के पैर छूकर आशीर्वाद मांगती हैं और करवा पर सुझाव देती हैं। कई जगहों पर करवा में दूध भरा जाता है और मिट्टी या चाँदी का चूर्ण डाला जाता है।
सरगी से पहले क्या करना जरूरी है?
इस शुभ दिन की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है और व्रत रखने वाली महिला सूरज की पहली रोशनी से पहले स्नान करती है और अपनी सास को सरगी का उपहार देती है। यह सरगी थाली इसी तरह से तैयार की जाती है कि यह व्रत रखने वाली महिला को पूरे दिन ऊर्जा प्रदान करती है।
पति का दीदार क्यों करते हैं पति का दीदार
सिद्धांत यह है कि छलनी में हजारों छेद होते हैं, जहां चंद्रमा के दर्शन करने से छेदों की संख्या अलग-अलग होती है। अब छलनी से पति को देखते हैं तो पति की उम्र भी उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए करवा चौथ का व्रत करने के बाद चांद को देखने और पति को देखने के लिए छलनी का प्रयोग किया जाता है, इसके बिना करवा चौथ अधूरा है।
करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अरग कैसे दिया जाता है?
करवाचौथ व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही किया जाता है। तो ऐसे में आपको बता दें कि चंद्रमा को अर्घ्य देते समय आपकी दिशा उत्तर-पश्चिम की ओर होनी चाहिए। इस दिशा में मुख करके चंद्रदेव को अर्घ्य देने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। और ज़िन्दगी में खुशियाँ आती है।
घर में करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
करवा के पूजन के साथ एक लोटे में जल भी रखें इससे चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा समय करवा चौथ व्रत कथा पाठ करें। चांद खोजे के बाद छलनी की ओट से पति को फिर से चांद के दर्शन कराएं। चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें और पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
करवा चौथ पर कौन सा रंग नहीं पहनना चाहिए?
करवाचौथ त्योहार का रंग लाल है क्योंकि इसे शुभ माना जाता है और उत्सव के दौरान महिलाएं इसे पहनती हैं। हालाँकि, कुछ अन्य रंगों के अलावा महिलाओं के कपड़े भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें पीला, हरा, गुलाबी और कच्चा शामिल हैं। हालाँकि, उन्हें काले या सफेद रंग से बचना चाहिए।
करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा होती है?
लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है। इसके अलावा भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की भी पूजा की जाती है। इसी तिथि को शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए चांदी के लोटे में दूध भरकर और चंद्र को देखते हुए अर्घ्य चढ़ाएं। इस दौरान चंद्र मंत्र ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।
चाँद को अरग कैसे दे?
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥ का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें। फिर उन्हें प्रणाम करके पति की लंबी आयु और सुखी जीवन की प्रार्थना करें। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करें। सूरत में चांद न दिखने पर इस प्रकार से दिया जा सकता है अर्घ्य.
चंद्रमा को जल चढ़ाने से क्या होता है?
शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा की रात चंद्र के उदय होने के बाद लोटे से जल व दूध का अर्घ्य शुभ होता है। इससे चन्द्र देव की कृपा बनी रहती है। पूर्णिमा पर चंद्र देव को देखकर ऊं सों सोमाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए, इससे जीवन में अपार सफलता मिलती है।
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पहले प्रकाशित : 30 अक्टूबर, 2023, 16:31 IST
