शाश्वत सिंह/झाँसी: बच्चे की इच्छा वाले लेकिन नाइचुरल तरीके से मां बाप ना बनने वाले लोग बड़ी संख्या में आईवीएफ (आईवीएफ) का सहारा ले रहे हैं। आईवीएफ (आईवीएफ) यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की प्रक्रिया से कई लोगों को माता-पिता बनने का सुख मिल जाता है। इससे जुड़े कई ऐसे सवाल भी हैं, जो लोगों के मन में रहते हैं. ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब आपके लिए लोकल 18 लेकर आए हैं।
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या आईवीएफ प्रक्रिया से हमेशा जुड़वां बच्चे (जुड़वा बच्चे) ही पैदा होते हैं। आईवीएफ के विशेषज्ञ और महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रामिता अग्रवाल ने बताया कि आईवीएफ से जुड़वा बच्चों का जन्म एक लॉजिक के पीछे होता है।
आईवीएफ का अचूक तरीका क्या है?
आईवीएफ के दौरान पुरुषों के शुक्राणु और महिला के एग मिलते हैं। मान लीजिए 10 स्पर्म और 10 एजी लिए गए। प्रमुख एब्रियो बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। अब ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी एब्रियो पुरी तरह विकसित हो जाएं।
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अधिक एब्रियोडायोड का उद्देश्य
अगर 5 एब्रियो भी पूरी तरह विकसित हो जाते हैं तो उन्हें यूटरस में डाल दिया जाता है। इसके बाद यह भी जरूरी नहीं है कि यह पांच एम्ब्रियो बच्चे का ले रेजिस्टेंस हो। अधिक एब्रियोडोडा का उद्देश्य यह होता है कि आईवीएफ का जो सैक्सेस रेट है वह बढ़ जाएगा।
जुड़वाँ बच्चे होने का कारण
इसके बाद पेशेंट से बताया गया कि एब्रियो का विकास किस प्रकार हुआ और इसके बाद पेशेंट से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया में अक्सर जुड़वाँ बच्चे होते हैं।
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पहले प्रकाशित : 31 अक्टूबर, 2023, 11:01 IST
