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ये पौधे नहीं, शुद्ध संजीवनी बूटी है, जड़-ताना-फूल हर चीज अमृत समान, 10 से ज्यादा ताकत रामबाण में


उत्तर

शरीर से फ्री रेडिकल्स खत्म हो जाते हैं जिससे सेल्स सेओडायडेटिव स्ट्रेस का खात्मा होता है।
यह सर्दी, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और अर्थराइटिस बीमारी भी बहुत काम की चीज है।

अविश्वसनीय औषधीय पौधा क्लेरोडेंड्रम 10 बीमारियों का इलाज करता है: यह एक तरह का चित्र है. इसका अंग्रेजी नाम क्लेरोडेंड्रम क्लेरोडेंड्रम है। इसमें सफेद रंग के आकर्षक फूल के कारण इसे सफेद बटरफ्लाई (सफेद तितली) भी कहा जाता है। अलग-अलग जगहों पर इसे अलग-अलग जगहों से जाना जाता है। आमतौर पर इसे भटवास, भट, भाट या भांट कहा जाता है। भँट का पौधा अत्यंत सुंदर होता है और इसमें फूल अत्यंत आकर्षक होते हैं। पहले यह सफेद होता है जो बाद में लाल रंग बन जाता है। भाट देखने में सुन्दर होता है नारियल ही यह औषधीय गुणधर्म से परिपूर्ण है। भाट बैक्टीरिया, डायरिया, पायरिया सहित कई तरह की दवाओं को ठीक करता है, इसलिए यह पौधे संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि इस पौधे की जड़ से लेकर खेती तक काम में लग जाता है। यह भारत, बांग्लादेश और म्यांमार में पाया जाता है।

इतना सख्त का इलाज

भाट का प्रयोग आयुर्वेद और सिद्धा के रूप में किया जाता है। विश्वास के अनुसार भट्ट की लत से डायरिया, लिवर डिजीज और सिर दर्द का इलाज होता है। वहीं इसके जड़ से डैंड्रफ, पायरिया, मलेरियल, स्कैबिज, त्वचा रोग, घाव, सूजन, सांप के टुकड़े, ट्यूमर, बिच्छू के टुकड़े का इलाज किया जाता है। इसके साथ ही एंटी-डायबिटिक और एंटीकॉन्वल्सेंट गुणों की प्रचुरता होती है। इससे मिर्गी का भी इलाज किया जा सकता है। यदि पेट में कीट-मकौड़े अधिक हो गए हैं तो इसके जड़ का कीड़ा सेवन करने से कीट-मकौड़े पेट में ही मर जाते हैं। भात पाचन तंत्र के लिए भी बहुत बेहतरीन है।

साइंटिफ़िक अनुसंधान में भी प्रवेश

वैज्ञानिकों के अनुसार वैज्ञानिक वैज्ञानिकों ने पाया है कि भट्ट के उपचार में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी डायबिटिक, एंटी-हाइपरटेनसिव, हाइपोग्लासेमिक और हॉप लिपिडमिक गुण होते हैं। यानि ये साल्स, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और अर्थराइटिस बीमारी में भी बहुत काम की चीज़ है। साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार भाट में जहर के प्रभाव को कम करने की क्षमता होती है। इसलिए भारत में इसका इस्तेमाल सांप और बिच्छू काटने वाले के इलाज में किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ये लिवर को तंदुरुस्त रखने में भी बहुत मज़ेदार है. शरीर से फ्री रेडिकल्स खत्म हो जाते हैं जिससे सेल्स सेओडायडेटिव स्ट्रेस का खात्मा होता है। इस प्रकार यह कई रेस्तरां से रक्षा करता है।

कैसे उपयोग करें

इन सभी बातों के अलावा भात के नुस्खे का किस तरह से इस्तेमाल किया जाए, यह आयुर्वेदिक या सिद्धा के डॉक्टर ही तय कर सकते हैं। इसलिए यदि आप भट्ट के औषधियों का प्रयोग करना चाहते हैं तो बेहतर यही रहेगा कि आयुर्वेद के चिकित्सकों से परामर्श कर लें। आमतौर पर इससे कोई नुकसान नहीं होता लेकिन डोज कितनी होनी चाहिए, इसके बारे में विशेषज्ञ की राय लेनी जरूरी है।

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