नई दिल्ली: क्या कोरोना की वैक्सीन से महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ गया है? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कोविड टीकों को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। मगर एक नए अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि कोरोना टिप्पणियों से अभद्रता का खतरा ज्यादा नहीं है। गर्भ धारण करने से पहले कोविड-19 टीकाकरण से जल्द या बाद में गर्भपात होने का खतरा नहीं रहता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है.
पत्रिका ‘ह्यूमन रिप्रोजेस्क’ में प्रकाशित शोध में, महिलाओं के लिए गर्भ धारण करने की योजना बनाने के लिए कोविड टीकों की सुरक्षा पर गहरी अंतरदृष्टि डाली गई है। अमेरिका स्थित बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में शोध का नेतृत्व करने वाली टीम को उम्मीद है कि ये नतीजे गर्भ धारण करने की योजना बना रही महिलाएं, और उन्हें स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान कर सकती हैं।
रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाली एवं संस्थान में अध्ययन के समय निकोलाई जूनियर जेनिफर वैलैंड ने कहा कि ये नतीजे गर्भ धारण की योजना बनाए जा रहे हैं। दिसंबर 2020 से नवंबर 2022 तक अमेरिका और कनाडा में 1,815 महिलाओं का अध्ययन किया गया। गर्भ धारण की पुष्टि के पहले दिन से लेकर गर्भपात होने तक उसका पालन किया गया। स्टडी में शामिल की गई आजाद महिला लैबोरेटरी में से 75 प्रतिशत ने गर्भ धारण करने से पहले कोविड की कम से कम एक खुराक ली थी।
शोधार्थियों ने कहा कि गर्भ धारण के बाद लगभग एक चौथाई महिलाओं का गर्भपात हुआ, और गर्भपात में 75 प्रतिशत आठ सप्ताह की गर्भावस्था से पहले हुआ, लेकिन खतरा बढ़ा नहीं था। टीकाकरण नहीं करने वाली महिला में गर्भपात का खतरा 26.6 प्रतिशत और गर्भधारण करने से पहले महिला गर्भपात में गर्भपात का खतरा 23.9 प्रतिशत था। इसके अलावा, तीन महीने पहले गर्भ धारण करने से लेकर सभी खुराक लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 22.1 प्रतिशत था।
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पहले प्रकाशित : 31 अक्टूबर, 2023, 19:02 IST
