सैमसन/अस्थायी. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में कई उद्यमियों का केंद्र रह रहे हैं। यहां के जंगलों में कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल निरोग निवास में आदिकाल से होता आ रहा है। फ़्रॉमाफ़ोर्ड जिला एफ़िलैम हिमालय से लगा हुआ है और यहां के लोग दोस्ती से दोस्ती के रिश्ते में स्वस्थ्य बने हुए हैं। अब सूखे में पाई जाने वाली इन मुर्गे को यहां के लोग समझाइश में भी ला रहे हैं और व्यापक स्तर पर उत्पाद बनाकर अपनी जीविका को और बेहतर कर रहे हैं।
हरी माता की जब भी बात आती है तो सबसे पहला नाम आता है जम्बू का। इसका इस्तेमाल यहां के खाने वाले लोगों में तड़का लगाने में किया जाता है. ज़ाम्बू प्याज़ की प्रजाति का एक पौधा होता है, जो उच्च हिमालयी क्षेत्र में ही विकसित किया जाता है। इसके पत्ते और गुलाबी फूल होते हैं।
इन फूलों में प्रभावशाली है जम्बू हर्ब
संस्थागत लोगों ने बताया कि जूँ के दैनिक उपयोग से सिरदर्द, बुखार, पेट की खराबी, मासिक धर्म में नशा कम करना, त्वचा की चमक को बनाए रखना, हृदय संबंधी बीमारी और रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा इसका दैनिक सेवन करने से नियंत्रित नियंत्रण रहता है। अच्छी बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। यही कारण है कि यहां के लोग आदिकाल से इसे स्थापित करते आ रहे हैं। इसके साथ ही इस प्राकृतिक औषधि-बूटी का उपयोग मुख्य रूप से कारी, सुपर, अचार आदि में होता है। इसके अलावा नॉनवेज कुक समय स्वाद बढ़ाने के लिए इसे भी आधिकारिक तौर पर डाला जाता है। विशेषज्ञों की राय तो इस जड़ी बूटी का उपयोग नेपाल और उत्तराखंड में कुकिंग और मेडिसिन परपज के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
जंबू की खेती को बढ़ावा दे रहा विभाग
आयुर्वेद के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी ज्योत्सना सनवाल ने बताया कि जम्बू में कई औषधीय गुण होने के कारण इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इसके उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से सितंबर-अक्टूबर तक आसानी से मिल जाती है। इसकी औषधीय खेती पड़ोसी देश नेपाल और तिब्बत में भी की जा रही है। जम्बू के उपचारों को सुखकर सांझ साल के भोजन के साथ अन्यत्र भी प्रयोग किया जा सकता है।
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पहले प्रकाशित : 1 नवंबर, 2023, 15:52 IST
