रजत भट्ट/गोरखपुर: कुल्फी का नाम दर्ज होने के बाद ही उसके मुंह में पानी आ जाता है। आओ भी क्यों न! अंतिम कुल्फी इतनी टेस्टी जो होती है। गोरखधंधे के अलावा यहां एक और चीज का स्वाद मशहूर है, जो मशहूर है कुल्फी। शहर में कुल्फी की एक ऐसी दुकान है जो 1969 में शुरू हुई थी और आज भी यहां तीन तरह की कुल्फी की दुकान है। यहां के लोगों को यहां के चित्र वाली कुल्फी बहुत पसंद आती है, यह पूरे दिन बिकती रहती है और लोग रहते हैं।
गोरखपुर के सिनेमा रोड पर मौजूद ‘लखनऊ कुल्फी’ के मालिक राजेश महेंद्रू के दोस्त हैं कि इस दुकान की शुरुआत उनके पिता सोहनलाल महेंद्रू ने 1969 में की थी। तब वह दो तरह की कुल्फी यहां बेचता था। मैग्गो वाली और दूसरी चित्रा थोथी वाली उन लोगों की पहली पसंद चित्रा वाली कुल्फी होती थी। लेकिन अब राजेश तीन तरह की कुल्फी बेचते हैं। जिसमें मैग्गो, ग्लूकोस डॉयचे के साथ शुगर फ्री वाली कुल्फी भी शामिल है। लेकिन आज भी उनकी दुकान पर कुल्फी के थोक ग्राहक आते हैं। सुबह 10 बजे यह दुकान खुलती है और रात 10 बजे तक यहां लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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लखनऊ कुल्फी पर राजेश के साथी हैं कि सीज़न में तो ड्रिक्स डॉयल वाली कुल्फी लगभग 80, 90 डब्बे बिक जाती हैं। साथ में शुगर फ्री और मैंगो वाले 60,70 डब्बे बिकते हैं। लेकिन सीज़न ऑफ़ स्टे की वजह से बिक्री में कमी होती है। यह लोग काजू, बादाम, केसर, पिस्ता के पिस्ता वाली कुल्फी तैयार करते हैं। शुगर फ्री वाले कुल्फी शुगर फ्री पाउडर के साथ तो आम वाली आम के साथ, इन सभी के दाम 50 से शुरू होकर 100 तक के होते हैं। दुकान पर आए रोहित के दोस्त हैं, यहां से वह पिछले 10 सार्जेंट से कुल्फी खा रहे हैं और टेस्ट कर रहे हैं। दुकान पर कुल्फी खा रही स्टॉक भी बताया गया है। टेस्ट लाजवाब है संगीत वाले कुल्फी ऐसी जगहें और नहीं।
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पहले प्रकाशित : 3 नवंबर, 2023, 14:17 IST
