विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद अब विवाह का लग्न शुरू होने वाला है। ऐसे में कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल में लोग महान संगीतकार के लिए पंडित के यहां जाते हैं। पूर्णिया के पंडित दयानाथ मिश्र कहते हैं कि मिथिलांचल में लोगों के लिए विवाह करना शुभ उत्सव माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है विवाह हरि शयनी तिथि अर्थात आस पास शुक्ल पक्ष की एकादशी तक मिथिला में विवाह किया जा सकता है। पुनर्स्थापना देवउठान ब्रह्माण्ड कार्तिक शुक्ल पक्ष तृतीय पक्ष के बाद विवाह का उत्सव शुरू होता है और देव उत्थान कार्तिक शुक्ल पक्ष तृतीय पक्ष तक विवाह होता है।
पंडित जी कहते हैं कि इसमें सबसे ज्यादा टैगड़ा लोन की अगर बात की जाए तो टैगड़ा लोन या शुभ मंगल कन्या और वर के कुंडली और राशि का मिलान कर लिया जाता है। जिसके बाद लोगों की राशि और कुंडली के अनुसार उन्हें शुभ माना जाता है।
महीने की इन तिथियों में शुभ त्यौहार होंगे
पूर्णिया के पंडित दयानाथ मिश्र कहते हैं कि विवाह का शुभ उत्सव नवंबर माह में 24,27,29, दिसंबर माह में 3,4,7,8,10,13,14,15, जनवरी माह में 17,18,21,22 ,31, फरवरी माह में 1,4,5,7,8,15,18,19,26,28, और मार्च माह में 3,4,6,7,8,10,11, और अप्रैल माह में 18, 19,21,25,26,28, मई महीने में 1, और जुलाई महीने में 5,10,11,12 को पड़ेंगे। हाँ, ये सभी उत्तम और शुभ अवतार हैं। इसमें कोई भी जातक विवाह कर सकता है।
लोग शुभ उत्सव की नहीं करते हैं फिक्र
पंडित जी आगे कहते हैं कि हालांकि, लोग शुभ विवाह में शुभ उत्सव की बात तो करते हैं, लेकिन शुभ उत्सव से लोगों को कोई मतलब नहीं होता है। लोग गाने, धूम धड़ाके में मशगुल होते हैं। जिस कारण उनकी शादी के शुभ उत्सव से कोई लेना देना नहीं होता है। वह लोग गीत संगीत की दुनिया में शादी के शुभ उत्सव को ध्यान नहीं देते हैं। हालाँकि, ऐसे लोगों को बाद में कई तरह की तस्वीरें भी आती हैं। उन्होंने कहा कि शादी के शुभ मुहूर्त में आप कन्या और वर दोनों के कुंडली और राशि के मिलान से ही निकलते हैं। और जातक को अपने जन्मोत्सव में ही विवाह करना विशेष होता है।
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पहले प्रकाशित : 3 नवंबर, 2023, 12:19 IST
