सोनिया मिश्रा/चमोली। कहते हैं ना कि अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी ताकत आपको रोक नहीं सकती है फिर मतलब यह नहीं है कि आपने शुरुआत में कहा था कि हो पहाड़ से या मैदान से।पहाड़ के युवा रोजगार की तलाश में अपने घर, गलियारों को शहर की ओर रुख करना पड़ता है लेकिन कोरोना काल के बाद बहुत से युवाओं ने विदेश से नौकरी छोड़कर अपने गांव गलियारों की ओर रुख कर लिया है।
कोरोना काल में घर वापस आने के बाद किशोरों ने अपना फिल्मांकन भी शुरू कर दिया, जिससे अब अच्छी फिल्में भी मिल रही हैं किशोर किशोरियों में से एक हैं धर्मवीर सिंह… जो उत्तराखंड के सीमांत जिले के जिला मुख्यालय गोपेश्वर के अशांत क्षेत्र घिंघरान रौली ग्वार के हैं फैन ने सिर्फ तीन साल पहले अपने घर की ओर रुख किया बल्कि अपना आइडिया मंडुए (कोदो) के मोमो बनाना शुरू किया। जिसमें सीखें उनकी मां से मिली. अब मंडुए के मोमो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाजवाब हैं इसलिए फास्ट फूड के शौकीन मोमोज को खूब पसंद भी कर रहे हैं.
पहाड़ में आसानी से मंडुआ
धर्मवीर शिक्षक हैं कि उनके रेस्तरां का नाम रॉक एंड रोल है। मंडुआ शरीर के लिए भी अच्छा होता है। साथ ही भागों में आसानी से मिल भी जाता है। इसलिए मुंबई से घर वापसी के बाद उन्होंने इसे फिल्म में शामिल करने की सोची। कहते हैं कि इसके लिए उन्होंने यूट्यूब से वीडियो देखना शुरू कर दिया और मोमोज का कॉन्सेप्ट दिमाग में आ गया। उसके बाद जब उन्होंने मंडुए के मोमोज़ की शुरुआत की और लोगों का उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिलना शुरू हुआ।
धर्मवीर का लक्ष्य क्या है?
धर्मवीर शिष्या हैं कि उनके शंकाल शोला को नए अवतार में रखा गया है। सभी मोटे अनाज से भी राख हो सके। इसके लिए अभी उनके साथ 3 से 4 लोग काम करते हैं और रिस्पॉन्स अच्छा रहेगा, वह और भी कुछ नया करेंगे। साथ ही उन्होंने लिखा है कि अभी उन्होंने सिर्फ मोमोज पर ही काम किया है और इसे लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं। मोमोज की कीमत 50 रुपए है। एक प्लेट में चार मोमोज़ नीचे दिए गए हैं।
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पहले प्रकाशित : 2 नवंबर, 2023, 14:59 IST
