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इस उपाय के फूल से है महँगाई घर-आँगन में हैं 5 बड़ी चुनौती, जोड़ों के दर्द से मिलती है राहत


पारिजात के लाभ: धार्मिक दृष्टि से इस उपचार का विशेष महत्व है। इसे कई संपत्तियों से जाना जाता है। परिजात, हरसिंगार, हरसिंगार, हरश्रृंगार, श्रृंगार आदि से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे नाइज जैस्मीन कहा जाता है। धार्मिकता के अलावा यह पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर है। हरसिंग से जोड़ों के दर्द और साइटिका से स्थायी राहत मिल सकती है। सिद्धांत यह है कि भगवान श्रीकृष्ण यह उपाय स्वर्ग से धरती पर लाए थे। शास्त्रों में पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है। एक अन्य सिद्धांत यह है कि पारिजात समुद्र तट से निकला है। मान्यता है कि जिस घर में हरसिंगार का पौधा होता है उस घर में हमेशा मां लक्ष्मी का वास होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से हरसिंगार एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणधर्मों की खुराक है।

हरसिंगार में गुण

आयुर्वेदिक डॉ. डायग्राम भवसार ने कहा कि हरसिंगार को रात की रानी भी कहा जाता है क्योंकि यह सिर्फ रात को ही खिलता है और सुबह हरसिंगार के फूलों के नीचे चंद्रा बिछी रहती है। हरसिंगार में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सब्सिडेंट्स गुण मौजूद रहते हैं। इस प्रार्थना से कई चुनौती में हरसिंगार की मिठाई देवदूत की तरह है। यह क्रोनिक बुखार, रूमेटाइटिस, अर्थराइटिस, ज्वेनाइट पेन, साइटिका और क्रोनिक बुखार में अत्यधिक दवा का उपयोग है।

हरसिंगार के 5 फायदे

  • जोड़ों के दर्द में-डॉ. डायग्राम भवसार का कहना है कि अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो हरसिंगार की मूर्ति, फूल और सेहत को ले लें। इसकी मात्रा लगभग 5 ग्राम होनी चाहिए. यह 200 ग्राम पानी में डूबा हुआ आलू है। जब एक तरबूज़ पानी का मसाला कर ख़त्म हो जाए तो यह अच्छा और ठंडा कर पीएं। जोड़ों के दर्द से राहत सुविधा।
  • क्रोनिक बुखार-अगर किसी को क्रोनिक बुखार है। यानि कि बुख़ार लगातार मासिक आधार से हो रहा है तो 3 ग्राम प्रतिजातियों के छात्र और 2 ग्राम इसके आरक्षित को पानी में ढ़ालें। इसमें 2-3 तुलसी के पत्ते भी दे दीजिये. अब इसे ठंडा कर पीएं. दिन में दो बार कुछ दिन तक पिएंगे तो पुराने से पुराना बुखार खत्म हो जाएगा।
  • इसके यूक्रेनी में मधुमेह रोधी गुण है। इसके लिए नामांकित को पीस लें और इसे पानी में बिजली गर्म कर सुबह-सुबह पी लें। ब्लड शुगर को बहुत हद तक नियंत्रित किया जाना चाहिए।
  • साइटिका में-3-4 भूख को ठंडा कर इसे पानी के साथ भरें और बाद में ठंडा कर खाली पेट पी लें। पुराने से पुराने साइटिका की बीमारी से उपकरण मिलेगा।
  • इस मौसम के लिए विशेष-खांसी में परिजात अत्यंत उपयोगी है। आख़िरकार इन दिनों में पारिजात की रेस्ट को चाय भी पी सकते हैं। यदि शून्य-जुकाम ज्यादा है तो परिवार की भूख को पीस लें और इसे पानी के साथ गर्म करें। इसमें छोटा सा अदरक भी पीसकर डाल दे। यह शहद के साथ प्रभावी है। सदी-जुकम को नमोनिशान मिट जाएगा।

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