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एमपी के इस गांव के किसान जड़ी-बूटी की खेती से हो रहे हैं मालामाल! रामबाण का इलाज, जानिए कैसे


दीपक पांडे/खरगोन।पुराने ज़माने में इस्तेमाल होने वाली कई ऐसी महंगी बूटियां आज भी मौजूद हैं जो कईयों को जड़ से ख़त्म करने में कारगार साबित होती हैं। जंगल में एक है सफेद मूसली, जो आम तौर पर घने जंगलों में पाई जाती है। यह एक औषधीय जड़ी बूटी है. लेकिन, भारत के कई राज्यों में अब इसकी खेती होने लगी है। इसका सेवन पाउडर और टैबलेट के रूप में किया जाता है। आज हम आपको मध्य प्रदेश में सफेद मूसली की खेती के बारे में बताते हैं और उपयोग के लिए इसे किस प्रकार से तैयार करते हैं।

सफेद मूसली का नाम पता है लोगों के दिमाग में बस यही ख़ाल बताता है कि यह सिर्फ शक्ति उपचार है, जो सेक्स पावर बढ़ाता है। जबकि सफेद मुसली शारीरिक शक्ति बढ़ाने के अलावा कई बीमारियों का रामबाण इलाज है। ओरियल सीज़न के सेवन से शरीर की कमजोरी तो दूर होती ही है, साथ ही गठिया, नशे, यूटीआई जैसी चीजों को दूर करने में भी मदद मिलती है। सफेद मूसली का उपयोग औषधीय, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में प्रमुखता से किया जाता है।

90 प्रतिशत किसान खेती करते हैं
भारत के अन्य राज्यों सहित मध्य प्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 21 किमी दूर ग्राम रायबिदपुरा में सफेद मूसली की खेती होती है। निमाड़ में इसे धवलाई मूसली भी कहते हैं। करीब 700 से ज्यादा आबादी वाले इस गांव में करीब 600 किसान परिवार रहते हैं। करीब 400 एकड़ में 90 फीसदी से ज्यादा किसान सफेद मूसली की खेती करते हैं. इस बार अगर आप यहां जाएंगे तो गली-गली में महिलाएं सफेद मूसली की सफाई के साथ हुई नजरें।

खेत से आगमन के बाद होती है सफाई

गांव के किसान देवता कहते हैं कि जून-जुलाई में बारिश के मौसम में सफेद मूसली की कटाई की जाती है। मूंगफली की तरह की जमीन के अंदर इसका निर्माण गुच्छे के रूप में होता है। अक्टूबर में फसल का जन्म होता है. वैल से आउटर फ़्लोरिडा होम रेस्टॉरेंट इसके ऊपर की मूर्ति के बाद की नकली की सहायता से आयोजित किया जाता है। 2 से 3 बार साफ पानी से कपड़े पहनने के बाद धूप में धूप सुखाते हैं। अनपेक्षित के बाद इसका पाउडर के रूप में उपयोग किया जाता है।

एक अनोखा पर होता है इतना दावा

गांव की महिला उमा का कहना है कि मूंगफली की तरह बाघ वाली सफेद मूसली की खेती में लागत कम होती है और सबसे ज्यादा होती है। हर किसान के यहां पर एक से एक नटखट में एक से दो का प्रोडक्शन होता है। थोक आवक इंदौर, मुंबई, मियामी, खरगॉन, खंडवा सहित अन्य आचल और राज्यों से व्यापारिक सामान लेने आती है। 1500 से 2000 रुपए किलो तक बिकती है सुखी सफेद मूसली। किसानों का कहना है कि सुखी सफेद मूसली से औषधि पाउडर और कैप्सूल का निर्माण होता है। घर पर भी दूध में काजू, बादाम के साथ इसका पाउडर मिलाकर पीने से कमजोरी दूर होती है और शरीर में शक्ति बढ़ती है।

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