सत्यम कटियार/फर्रुखाबाद: सनातन में दीपावली की अंतिम जोड़ियां पर हैं। इस दिन भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। इस पूजा में शक्र से बने मिठाई वाले खिलौनों का उपयोग किया जाता है। श्री गणेश और लक्ष्मी जी को इसी तरह का भोग लगाया जाता है। वैसे तो तरह-तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं, लेकिन इस खिलौने वाली मिठाई की बात अलग है। यह मिठाई सिर्फ में ही है. आजकल फर्रुखाबाद में फैक्ट्री के खिलौने बनाए जाते हैं।
फर्रुखाबाद के कमालगंज में 10 से अधिक पारिवारिक घरों में पांच से अधिक समय से यह पुश्तैनी व्यवसाय कर रहे हैं। लेकिन, प्रकार के दावे 3 साल से जिस शोरूम की शोभा बढ़ाते हैं और चीनी के बांध भी चढ़ाए जाते हैं, उन पर बुरा असर पड़ता है। अंकित हैं कि आज के समय में लोग खिलौनों को कम दिशा में रखते हैं, दूसरी ओर इसमें और भी अधिक लागत आती है। यही कारण है कि अब कमालगंज में कुछ चुनिंदा लोग ही इन खिलौनों को बना रहे हैं, जिनके पास इस समय नंबर बड़े हैं।
दीपावली के लिए तैयार हो रहे तीन खिलौने
इस समय दीपावली को लेकर वे खिलौने वाली मिठाईयां बना रहे हैं, जिसमें पांच काम कर रहे हैं। वहीं एक दिन में 3 कुंतल खिलौने तैयार हो जाते हैं, जो बाजार में 70 रुपये किलो की कीमत से बिकते हैं। आगे बताया कि यहां रोजाना 3 से 5 हजार रुपये की बचत हो रही है, किस प्रकार की बिक्री हो रही है। उस खाते से महीने में 50 से 60 हजार रुपये का दावा आसानी से हो जाता है।
निर्मितदार लकड़ी के बने होते हैं फर्मा
खिलौने वाली मिठाई बनाने के लिए जिन फर्मा का उपयोग किया जाता है, वो लकड़ी के होते हैं। इसमें गर्म शकर से बनी चाशनी को शामिल किया जाता है। ये हाथी, शेर, घोड़े, मछली, बत्तख और कमल की पत्तियाँ वाले खिलौना दीपावली पर बहुत खास होते हैं,प्रोडोस्को बने रहते हैं। वहीं इनमें से सबसे ऊपर बच्चों को भी काफी पसंद किया जाता है.
खिलौने बनाने का क्या है तरीका
प्रशिक्षुओं के खिलौने बनाने के लिए आपके पास भट्टी होनी चाहिए, जिस पर टुकड़ों में शक़्कर की चाशनी तैयार की जाती है। इसे उस समय तक लगातार गर्म किया जाता है, जब तक चाशनी जमने के रूप में न आ जाए। खिलौने बनाने के लिए लकड़ी से बनी फर्मा में ये चाशनी भरी जाती है। कुछ देर बाद कूल पर इन फर्मा पर फिल्में बनाई जाने लगीं।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 08:01 IST
