शक्ति सिंह/कोटा. दीपावली हो और मिठाईयाँ ना हो, ऐसा नहीं हो सकता। लोग पहले से ही मिठाईयों की लिस्ट बनाते हैं और ये सोचते हैं कि कौन सी मिठाईयां खरीदती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कोटा बाजार में संगम स्नोकी की गिरावट सबसे ज्यादा है। दीपावली के समय में कोटा शहर संगम स्नोकी की लहरें बढ़ गई हैं। आखिर इसमें क्या है खास? देखिए काजू कतली के साथ का संगम किस तरह से अनोखा है.
रतन स्वीट्स के ओनर मनोज जैन ने बताया कि संगम स्नोकी को काजू कतली से संशोधित किया गया है। 15 साल बाद कोटा से ही इसकी चलन शुरू हुई और धीरे-धीरे इसका स्वाद इतना मशहूर हो गया कि अन्य राज्यों में भी इसकी भारी मांग बनी हुई है। दीपावली के उत्सव पर संगम स्नोकी की कई बड़ी वस्तुएं रहती हैं जिसमें 840 रुपये की संगम स्नोकी दी जाती है।
संगम स्नोकी बनाने का तरीका
मनोज जैन ने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले काजू के लिए जाते हैं और उन्हें 3 घंटे तक पानी में डुबो दिया जाता है। उसके बाद काजू को मशीन में स्टाक पीसते हुए उसका पेस्ट बना दिया गया। पीसने के बाद काजू में आकार मिलाकर उसकी बड़ी प्लेट में सिकाई की जाती है. जब तक काजू का पेस्ट अच्छे से सिक जाता है तब तक उसे भट्टी से उतारकर ठंडा कर काजू की मिक्सी मशीन में पेस्ट की घूटई मिलती है। उसके बाद पेस्ट को बड़े पाटे पर या समरूप स्थान पर फैला दिया जाता है और बेलन से सेस को समरूप बना दिया जाता है। लगभग 2 घंटे बाद, एक और पेस्ट टूट गया। संगम स्नोकी के ऊपर पेठा वकंद, मावा का पेस्ट में पेस्ट सिकाई कर ले तैयार है. जब इसकी सबसे अच्छी तैयारी हो जाती है तो उसे पाटे पर समलोम काजू पर लेप लगा देते हैं। ऊपर डाले गए हैं काजू बादाम पिस्ता शायरी के टुकड़े। 8 घंटे तक इसे सेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है। और फिर बाद में ट्राई ने कहा कि इसे काट लिया गया है और संगम स्नोकी तैयार हो गई है।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 20:13 IST
