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9 महीने पहले हुई थी मौत, परवेज मुशरफ की मौत की सजा पर अब होगी सुनवाई, जानिए पूरा मामला


परवेज़ मुशर्रफ़ - इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: फ़ाइल
परवेज़ मुशर्फ़

परवेज़ मुशर्रफ समाचार: किसी की मौत के बाद उसकी मौत की सुनवाई… ये सुनकर बड़ा अजीब लगता है। लेकिन यह सांख्यिकी है। उनका कोई भी आम आदमी नहीं है बल्कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ हैं। पाकिस्तान के इस पूर्व तानाशाह की फरवरी 2023 में मृत्यु हो गई थी। अब 9 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच जनरल मुशर्रफ की ओर से कई अभिलेखों की सुनवाई हुई। इनडायरेक्ट अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ये पेज पिटीशन्स 17 दिसंबर 2019 को पूर्व तानाशाह को फासीवादियों के खिलाफ सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान की दो अदालतों ने गद्दारी के आरोप में मुशर्रफ को ये सजा सुनाई थी. उन पर लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार को गिराने का आरोप था।

10 नवंबर से होगी सुनवाई शुरू

पूर्वी पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ की दोषसिद्धि से संबंधित विभिन्न अपीलें सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार यानी 10 नवंबर से सुनवाई शुरू होंगी। इन विभिन्न अपीलों में परवेज़ मुशर्रफ की भी एक अपील शामिल है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत की सज़ा को पलटने की गुज़ारिश की थी। पाकिस्तान की एक विशेष अदालत में परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। इसके खिलाफ मुशर्रफ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

विशेष अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई

17 दिसंबर, 2019 को पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक अहमद सेठ पर वेसे मुशर्रफ को तीन जजों की विशेष अदालत ने संविधान के उल्लंघन के लिए निर्देश दिया था। इसके बाद मुशर्रफ की गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सज़ा का प्रावधान ख़त्म कर दिया गया।

लाहौर उच्च न्यायालय ने मृत्युदंड की सज़ा को रद्द कर दिया

हालाँकि विशेष अदालत के इस फैसले में पाकिस्तान की सेना ने क्लॉज़ स्पष्ट की थी। इसके बाद लाहौर उच्च न्यायालय द्वारा मुशर्रफ की मौत की सजा को रद्द कर दिया गया था। खास बात ये है कि लाहौर उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी 2020 को विशेष अदालत की याचिका के गठन को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

मुशर्रफ के वकील सलमान सफदर पेश करेंगे

10 नवंबर को पहली सुनवाई में मुशरफ की तरफ से उनके वकील सलमान सफदर पेश होंगे। सलमान ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक अपील करते हुए कहा था- मेरे मरहूम (दिवंगत) मुवक्किल को जिस तरह की सजा सुनाई गई थी, वो पाकिस्तान के संविधान और आपराधिक संहिता 1898 का ​​उल्लंघन है। इसके पहले भी मुशर्रफ की तरफ से उनके वकील ने स्मारक की जगह पर कुछ याचिकाएं निकालीं। इनमें मुशर्रफ की सजा सस्पेंड करने की मांग की गई थी।

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