अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर. विचारधारा के पर्व दीपावली पर मिठाई का नाम आते ही काजू कतली, स्नोकी, गुलाब जामिन, घेवर याद आते हैं, लेकिन विचारधारा की एक गली में पाकिस्तान के सिंध की एक मिठाई की डिश लोगों को खूब भा रही है। भारत-प्रवीणिस्तान के आदिवासियों के बाद मुल्तान अमरकोट से आए एक परिवार ने कराची के हलवे का बिजनेस शुरू किया है, जोकी में ही नहीं राजस्थान, दिल्ली, गुजरात समेत करीब 12 राज्यों में यहां का जायका लोगों की धूम मची हुई है।
भारत के हर राज्य, गांव और गलियों में तरह-तरह के खाने की विविधताएं हैं, जिनका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। जेनी में से एक है कराची हलवा. अब आप सोच रहे होंगे कि कराची हलवा तो पाकिस्तान में है, लेकिन आपको बता दें कि कराची हलवा अमेरिका में बहुत फेमस है। सरहद के उस पार का स्वाद सरहद के इस पार के लोगों की थाली में मनाया जा रहा है। 1947 में जब सरहद खानदान था और ये दोनों देश अलग-अलग हो गए थे, तब पाकिस्तान के सिंध सिंघाड़े से हजारों परिवार हिंदुस्तानी बस्ती थे। यह परिवार अपने साथ सिंध के ज़ायकों को भी ले आये थे। जेनी में से एक हैराखी का हलवा.
हलवे के लिए लंबी लाइन लगती है
मुलत: पाकिस्तान के सिंध के अमरकोट में रहने वाले हेमराज खत्री के परिवार ने 1991 में भारत को वतन बनाया और तबसे हर त्योहार पर उनके घर में कराची हलवा लेने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ती है। कराची का हलवा केसरिया और हरे रंग का अपना-अपना स्थान पाया जाता है। हेमराज के बेटे मुकेश कुमार खत्री दोस्त पहले उनकी मां हलवा थीं, अब वह कराची का जायका लोगों तक पहुंचा रही हैं। आज से यह कराची, हलवा, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, फीमेल, सूरत, जयपुर समेत करीब 12 राज्यों तक पहुंच रहा है।
6 महीने बुरा नहीं होता हलवा
मुकेश कुमार खत्री के अनुसार कराची हलवे की सबसे बड़ी जगह यह है कि यह करीब 6 महीने तक खराब नहीं होती है। उन्होंने लिखा है कि इससे निशास्ता, घी, शकर, काजू, बादाम, पिस्ता, तिजारा आदि को मिलाकर कराची हलवा बनाया जाता है। उन्होंने कराची का हलवा 600 और 1100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा है। उदयपुर में दिवाली उत्सव पर करीब 150 किलो कराची हलवा की बिक्री होती है। अगर आप भी मुकेश खत्री के घर बने स्वादिष्ट हलवे का स्वाद लेना चाहते हैं, तो उनके मोबाइल नंबर 91-8000630570 पर संपर्क कर सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 9 नवंबर, 2023, 13:51 IST
