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महिलाओं के लिए ‘वरदान’ है ये औषधीय पौधा! गर्भनिरोधक औषधियों के मूल गुण क्या हैं कम, जानिए इसके गुण


सोनिया मिश्रा/कीमी. इस धरती पर कई ऐसे उपाय पाए जाते हैं, जिनमें चमत्कारी औषधीय गुण मौजूद होते हैं। जिस कारण ये अपने खास महत्वपूर्ण हैं. कंपनी में एक पौधा है लोध्र (लोध) का पौधा। भारत के अधिकांश वैज्ञानिकों में पाया जाने वाला ये पौधा महिलाओं, पुरुषों के लिए खास माना जाता है। साथ ही उपाय की जड़, पादरी वफ़ा सभी काफी मज़ेदार हैं। इसे संरक्षित करने का काम उत्तराखंड की एक संस्था ने किया है।

2850 में लोध्र के 2000 के दशक में 2850 लोध्र के संयुक्त उद्यम में काम करने वाली संस्था और उनके सहयोगी किरूली, मल्ला तांगणी, सुतोल, कनोल, सुनाली, जुमला और नौरख गांव की महिलाओं ने 2850 में लोध्र के संयुक्त उद्यम में काम किया था। जिसमें 250 उपकरण बायो टूरिज्म पार्क पीपलकोटी में सुरक्षित रखे गए हैं। वर्तमान में जंगल से लोध के बीज व्यवसायी बने जा रहे हैं और रेस्तरां स्थापित किये जा रहे हैं। इस काम के लिए लाइफस्टाइल डेवेलोपमेंट एंड चैरिटेबल ट्रस्ट संस्था की भी मदद कर रही है।

लोध्र की प्रकृति क्या है?
लोहद्र के पेड़ के बारे में कहा जाता है कि इसके हर हिस्से में औषधीय तत्व मौजूद होते हैं। यहां तक ​​कि इसके छात्रों में भी कई तरह के औषधीय गुण होते हैं, जो कई तरह की दवाओं को ठीक करने में काम आते हैं। इस शोध के वैज्ञानिकों और जड़ में फ्लेवोन स्ट्रेटिक्स, टैनिन, वेवेरोलोल, लोध्रोल, लोध्रिन, एपिक्टिन, बेटुलिनिक एसिड, लोध्रिकोलिक एसिड, बेटुलिक एसिड, लोड्रोसाइड जैसे तत्व मौजूद हैं। जो घटक के रोग, मलरोग, मधुमेह संबंधी विकार, गर्भनिरोधक औषधियों के घटक को कम करने में भी दावा साबित होते हैं। साथ ही पेट में जलन, शुगर की वजह से गठिया, खून की कमी, अल्सर का फैलाव रुकना, कैंसर के प्रभाव को कम करना, गर्भ के कैंसर को ठीक करना, पाचन को ठीक करना, कफ और पुरानी खांसी, पेट में खराबी और अल्सर की वजह से बनाए गए ऑर्गनाइज़ेशन को ठीक करने में मज़ा आता है।

आसानी से नहीं जमते लोध के बीज
केमिस्ट्री रेजिडेंट एक्टर्स एक्टर्स एक्टर्स एक्टर्स इंजीनियर्स कुवंर हैं कि लोढ़ा के बीज आसानी से नहीं जमते हैं। पेड़ पर ही अंकित काले टुकड़े को तुरंत गुनगुने पानी में डूबाकर रेतीली और भूर-भूरी मिट्टी में बोना चाहिए। जिसके बाद ये बीज एक महीने के अंदर जमने शुरू हो जाते हैं। बाद में जब पौध थ्री-चार इंच की हो जाए, तो उन्हें एक साल की कोचिंग के लिए दूसरे साल की कोचिंग के लिए भेज दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि लोध का पौधा पहले तीन साल तक धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर अगले 5-7 साल के बीच इसकी तेजी से बढ़ोतरी होती है। इसके बीज का जमाव हो सकता है, लेकिन सबसे अच्छा बीज का जमाव तब होता है जब बंदर, लंगूर और लंगूर इसके बीज खाते हैं, तो उन जगहों पर लोध के बीज आप ही जाम कर देते हैं।

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