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डीपफेक वीडियो कैसे बनाएं, किसी के शरीर पर कैसे फिट होता है कोई दूसरा चेहरा? लो समझो पर कभी मत बनाओ


उत्तर

डी.पी. का मतलब है गहराई और दूसरा फ़्रांसीसी फ़्लोरिडा..
यह किसी वस्तु को गहराई से समझने या पढ़ने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
इस तकनीक में एक तो राक्षसडर होता है दूसरा डिकोडर।

नई दिल्ली। हाल ही में रश्मीका मंदाना का एक वीडियो वायरल होने के बाद डीपफेक सैट पर काफी चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया और गूगल पर लोग सर्च करना भी शुरू करें ताकि अंतिम डीपफेक सामग्री या वीडियो कैसे बनाया जा सके। इसके बारे में आज हम पूरी जानकारी दे रहे हैं कि किसी वीडियो का डीपफेक पेज कैसे तैयार किया जाए। लेकिन, बेहतर होगा कि आप इस तरह का वीडियो न देखें जो आपके हित में रहेगा। सरकार ने हाल ही में वायरल हुए ऐसे वीडियो में 3 साल की जेल और 1 लाख की सज़ा का ही खंडन किया है।

देसी, डीपफेक वीडियो बनाने वाले ऐप और वेबसाइट गूगल पर मौजूद हैं। जो तकनीक इसमें काम करती है वह पूरी तरह से आर्टिफिशियल साइंटिस्ट पर प्रतिबंधात्मक काम करती है। डीपफेक दो स्टूडियो से मिलकर बनी है, पहली डीप का मतलब है कि गहराई और दूसरी डीप का मतलब है गहराई। डी.पी. एस. का प्रशिक्षण भी दिया गया है, जो किसी भी वस्तु को गहराई से समझने या पढ़ने के लिए स्थापित किया जाता है। डीप लर्निंग को डीपफेक में शामिल करने का मतलब यह है कि किसी किताब को इस तरह से समझा जाए या उसकी कहानी या वीडियो बनाया जाए, जिसे देखने-सुनने में बिल्कुल असली लगे।

डीपफेक वीडियो तकनीक कैसे काम करती है
टेक्नोलॉजी के सिद्धांत का कहना है कि डीपफेक वीडियो बनाने के लिए जिस टेक्नॉलजी की स्थापना होती है, उसमें एक तो ग्राइंडर होता है और दूसरा डिकोडर होता है। मसलन, मसलन किसी वीडियो या इमेज को देखने के लिए हूबहू उसकी नकल तैयार करता है और डिकोडर को उसकी जांच के लिए भेजा जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक पूरी तरह से रियल लीज वाला वीडियो तैयार नहीं हो पाता। साथ ही यह प्रक्रिया एक चेन के रूप में चलती है जिसे एबिटिव एडवरसेरियल नेटवर्क (जीएएन) कहा जाता है। जब डिकोडर ने यह बताया कि बनाया गया वीडियो पूरी तरह से वास्तविक दिख रहा है तो उसे वायरल कर दिया जाता है।

सबसे आसान है डिपफेक वीडियो बनाना
ऐसा नहीं है कि डीपफेक वीडियो या मस्जिदा मंदाना के बाद ही इसका प्रचलन शुरू हुआ है, बल्कि साल 2017 के बाद से ही इसकी शुरुआत हुई है. इसके लिए कुछ इमेज या वीडियो को डीपैकेज मेकिंग वाले ऐप में डाला जाता है और वह बिल्कुल रियल लीक्स वाला नया सैट तैयार कर देता है। आप इसमें किसी भी वीडियो पर अपना टैसवीर लगा सकते हैं या किसी वीडियो पर किसी सेलिब्रिटी का टैसवीर या वॉयस एक्सेस कवर तैयार कर सकते हैं।

  • 5 डॉयरटेप में तैयारी हो जाएगी वीडियो
  • सबसे पहले आप डीपस्वैप, डीपफेक वेब, जिग्गी, डीपफेस लैब और ज़ाओ डीपफेक ऐप जैसे डीपफेक ऐप जैसे डीपफेक फॉर्म वाले एक बेहतरीन रियलिटी क्रिएटर की तलाश कर रहे हैं, जहां आप अपने किसी भी फ्रेंड का डीपफेक वीडियो तैयार कर सकते हैं।
  • अब उस पोस्ट या सेलिब्रिटी की तसवीर वीडियो डालिए जिसका डीपफेक वीडियो बनाना चाहते हैं। इसके लिए आप लाइकक्रिनशॉट या कैसी भी तसवीर या वीडियो का यह वीडियो डाउनलोड कर सकते हैं।
  • फिर अपनी तसवीर या आवाज को उस सॉफ्टवेयर में डालिए जहां मस्टर्ड-डिकोडर तकनीक को सेलिब्रिटी के साथ बदल देवी ने तैयार किया।
  • इस वीडियो में आवाज ओरिजनल होने के उत्सव में आप भी कदम डाल सकते हैं। वॉयस क्लोनिंग सॉफ्टवेयर आपके वीडियो पर किसी की भी आवाज लगाई जाए, भले ही वह कुछ भी बोल रहा हो। इसमें वॉयस चेंज के साथ लिप्स डॉक्युमेंट्री भी बहुत पसंद है। इसके लिए सॉफ्टवेयर को बस आवाज का मिश्रण देना होता है।
  • सॉफ्टवेयर पर ये साड़ी सामान बेचने के बाद आपको हाल ही में एक डीपफेक ससेज वीडियो मिलेगा।

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सरकार सच, फँस गये तो…
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डीपफेक यात्रा को लेकर साखत रुख तय किया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगर किसी को ऐसी स्कीम बनाने और वायरल करने का खुलासा मिलता है, तो उसकी स्ट्रीम स्ट्रीम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए क़ानून सेशन 66डी का प्रस्ताव दिया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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