Homeछत्तीसगढ़सफलता-कहानी-महिला-छत्तीसगढ़-बना अमीर-गाय-गोबर-उत्पाद-भारी-मांग-दिल्ली-मुंबई – News18 हिंदी

सफलता-कहानी-महिला-छत्तीसगढ़-बना अमीर-गाय-गोबर-उत्पाद-भारी-मांग-दिल्ली-मुंबई – News18 हिंदी


रामकुमार नायक, रायपुरः राजधानी रायपुर के गोकुल नगर गौठान की महिलाओं ने इस दीपावली पर मिशाल पेश की है, और महिलाएँ गोबर के देखाये उन्हें रंग-बिरंगे बनाये में लाग दिये गये हैं. इन दीयों की मांग ने दिल्ली, नागपुर, कोलकाता जैसे शहरों के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया जाता है। इस बार के फेस्टिवल में इन गोबर के दीयों से रंगत बनेगी, और ये गोबर के दिए छत्तीसगढ़ की कला और शिल्पकला को प्रोमोट करेंगे.
एक प्राथमिक सेवा समिति द्वारा संचालित हमर गौठान रायपुर के संतोषी नगर क्षेत्र में स्थित है, जिसे गोकुल नगर गौठान के नाम से भी जाना जाता है। इस त्योहारी सीज़न में यहां से जुड़ी महिलाएं अच्छी तरह से सामान रख रही हैं। गोकुल नगर गौठान की महिलाओं द्वारा निर्मित दीयों की दिल्ली, नागपुर, कोलकाता और मुंबई में काफी बिकवाली हो रही है। इन रंग-बिरंगे दीयों की दूसरे राज्यों में भी सजावट है। इस सीजन में महिलाएं अब तक एक लाख से ज्यादा दीये तैयार कर चुकी हैं। स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मूल कार्य से जोड़ने के लिए, गोकुल नगर गौठान में शेड उपलब्ध कराया गया है। यहां की महिलाएं गोबर के दिए और विभिन्न शिक्षण संस्थाएं बना रही हैं।

गोबर के दीयों की डिजायटी तेज
गोकुल नगर गौठान से जुड़ी महिला लोमीन पाल ने बताया कि इस दिवाली महिलाएं गोबर के ढेर बनाती हैं, अलग-अलग तरह के कई डिजाइन तैयार किए गए हैं। छोटे दिये, बड़े दिये, पाँच दीप जलाने वाले दिये, मोर, थाली जैसे कई डिज़ाइन बनाए गए हैं। दिवाली के समय में गोबर के दीयों की भारी मांग है, जिसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग हो रही है।

इस प्रकार बनाए जाते हैं दिए गए
इन दीयों को बनाने के लिए ग्वार गम, गोबर पाउडर को साँचे में मिलाकर तैयार करने में सहायता की जाती है, और लगभग 6 कई दिनों तक सुखाया जाता है. इसके बाद रंग भरने की प्रक्रिया की आवश्यकता होगी, इन दीयों को बाजार में पेश किया जाता है। दिवाली के करीब 6 एक महीने पहले से ही गोबर के दीयों की तैयारी शुरू हो गई है, और इस सीजन में एक लाख से ज्यादा दीये बिक गये हैं. इन दीयों की कीमत अलग-अलग है, जिसमें एक दीये की कीमत 2 रु5 रुपये और 50 रुपये की रेंज है.

टैग: दिवाली का त्यौहार, स्थानीय18, सफलता की कहानी



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