आखिरी बड़कुल/दमोह: जिले के तिडोनी गांव के सोमेश गुप्ता ने अपने खेत में करीब 30 से 35 कमीला के पेड़ लगाए हैं, जो देखने में काफी खूबसूरत हैं। यह फल से सिन्दूर बनता है। इस सिन्दूर का हिंदू धार्मिक अनुष्ठान से लेकर भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। पक्की पर सुहागिन महिलाएं इस कुमकुम को अपनी मांग में भरती हैं। वैसे तो सिन्दूर हर दुकान पर उपलब्ध होता है और सिन्दूर का मिश्रण, हल्दी, मार्करी का मिश्रण तैयार किया जाता है।
लेकिन, आज भी बहुत से लोग इस से अनभिज्ञ हैं कि यह सिन्दूर का पौधा भी होता है, जिसे अंग्रेजी में कुमकुम वृक्ष या कमीला वृक्ष कहा जाता है। अन्य वनस्पतियों की तरह यह पेड़ भी फल देता है, फल के अंदर कुछ बीज होते हैं, जो पाउडर और मसाले के रूप में सिन्दूर के रूप में लाल डाई बनाते हैं। कई लोग इसे अनमोल पेड़ भी कहते हैं, क्योंकि इसमें से जो रंग टैटू है, उसकी तलाश में ही आपके अवशेष को रंगा जा सकता है।
आखिर कैसे उगता है सिन्दूर का पौधा
बता दें कि यह सिन्दूर का पौधा घर में आसानी से उग नहीं पाता है, क्योंकि यह एक अलग तरह का पौधा होता है। इसके साथ कुछ ऐसा है कि यदि आप इसके उपचारों को अधिक पानी या खाद दे देते हैं तो यह पौधा मर जाएगा और यदि कम दिया जाए तो फल नहीं मिलेगा। इसके एक पेड़ में से एक बार में एक से एक टुकड़ा किल तक सिन्दूर फल निकाला जा सकता है। वहीं, इंकलाब में इसकी कीमत करीब 300 से 400 रुपए प्रति किलो है। कमीला का पेड़ 20 से 25 फीट तक ऊँचा होता है, जिसका अमरूद का पेड़ लगभग एक ही स्थान पर होता है।
कमाई वाली खेती
सोमेश गुप्ता ने बताया कि हमारे धार्मिक आयोजनों में इस सिन्दूर का उपयोग किया जाता है। यदि रोजगार की दृष्टि से देखा जाए तो इसकी खेती करके किसान भाई अच्छा लाभ कमा सकते हैं। यह वह खेती है जिसका उपयोग प्रतिदिन किया जाता है।
.
टैग: दमोह समाचार, स्थानीय18, एमपी न्यूज़
पहले प्रकाशित : 10 नवंबर, 2023, 20:39 IST
