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भारत से ‘डेमेज कंट्रोल’ क्लिनिकल कनाडा में, जयशंकर से संपर्क में कनाडाई विदेश मंत्री मेलिनी जोली हैं


​कनाडाई विदेश मंत्री मेलिनी जोली और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर।- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: फ़ाइल
​कनाडाई विदेश मंत्री मेलिनी जोली और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर।

भारत कनाडा: भारत और कनाडा के आजकल बुरे दौर में गुजरात चल रहे हैं। इसी बीच कनाडा की विदेश मंत्री मेलिनी जोली ने कहा है कि वह भारत से रिपब्लिक की हिमायती के भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के संपर्क में हैं। दोनों देशों में सऊदी अरब को मजबूती के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि यह समय दोनों देशों के लिए कठिन है, क्योंकि दोनों देश दशकों से निष्क्रिय चल रहे हैं। कनाडा के विदेश मंत्री जापान की राजधानी टोक्यो में जी7 की बैठक में भाग लेंगे। इससे पहले मीडिया से चर्चा में उन्होंने भारत से संबंध को लेकर कई बातें कहीं।

मीडिया से चर्चा में उन्होंने भारत से जुड़े सवालों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वे पहले भी कह चुके हैं कि वे अपने समकक्ष एस जयशंकर से संपर्क में हैं और हम समझते हैं कि इस समय दोनों देशों के संबंधों का यह बुरा समय है। लेकिन मुझे विश्वास है कि हम इस कठिन रास्ते से निकलेंगे। हमारे शेयर्ड हिट हैं और हम सामूहिक म्यूजिक सॉल्व कर सकते हैं।

भारत से 41 राजनैयिकों को वापस ले जाएं क्या बोलें मेल?

दरअसल, पिछले दिनों भारत ने कनाडा के 41 लोकतंत्रों को वापस भेजा था। इस पर मेलिनी जोली ने कहा कि कनाडा के लोकतंत्रों को भारत से गायब कर दिया गया था क्योंकि भारत ने अपनी प्रतिरक्षा वापस ले ली थी। ऐसे में हम अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते थे। कनाडाई विदेश मंत्री ने भारत से रिश्ते के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि भारत ने कनाडा के 41 जासूसों को वापस भेजा था, लेकिन कनाडा बदले की कार्रवाई नहीं चाहता था।

भारत और कनाडा में क्या है विवाद?

18 जून को कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर के गुरुद्वारे की गोली से हत्या कर दी गई थी। हरदीप सिंह निज्जर भारत में आतंकवादी अपराधी था। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की हालिया जांच के बिना ही कनाडा के जस्टिन ट्रूडो ने भारत निज्जर की हत्या में भारत सरकार को अपनी किरकिरी करवा ली थी। उनके इस अनर्गल बयान ने भारत पर कड़ ऐतराज का दबाव डाला था। यही कारण है कि भारत ने कनाडा के 41 पत्रकारों को वापस भेजा था। ट्रूडो को गैर जिम्मेदाराना बयान देते हुए अपने ही देश में आरोपों का सामना करना पड़ा। भारत ने भी ट्रूडो के मेमोरियल को बेतुका बताया था। भारत ने कनाडा के नागरिकों के लिए वीर सेवाओं को समाप्त कर दिया था। हालाँकि डेप्स महीने में भारत ने फिर से वर्जिन सेवाओं को बहाल कर दिया है।

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