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बड़े-बड़े ब्रांड पर भारी है हींग के सुगंध वाले ये स्वाद, 200 साल पुराना है इतिहास


सत्यम कटियार/फर्रुखाबादःजब भी दालमोट का नाम आता है तो हर व्यक्ति विशेष के लिए आटूर हो जाता है। इसके चटपटे स्वाद का एहसास दिल पर छा जाता है। ऐसी वैश्या से आश्रम वाली सबसे खूबसूरत जगह से हर व्यक्ति की नज़र इस ओर आकर्षित होती है। प्रदेश स्तर पर फर्रुखाबाद की पोस्ट आपके लिए बहुत प्रसिद्ध है। प्रदेश के बाद देश में फर्रूखाबाद की सूची बड़े स्तर पर बिक्री होती है।

सागर स्टाफ़ की दुकान 70 साल पुरानी है। एक समय जब जिले में कम अनाज थे। लेकिन इसके बावजूद भी यहां पर 25 से 30 प्रकार की दालमोटबनाई मिलती है। वहीं यहां पर रोजाना चार से पांच हजार रुपए का लाभ मिलता है। जिस महीने में यात्रा से 70हजार रुपये की बरामदगी हो जाती है। फर्रूखाबादी ऑर्थोडॉक्स में यहां से ही जाना जाता है। मुख्य रूप से यहाँ पर अनेक वस्तुएँ मौजूद हैं। जहां पर यहां से संबंधित वैराइटी तैयार की जाती है। जिले में एक आंकड़े के अनुसार 15,000 करोड़ रुपये का स्टार्च के साथ कारोबार होता है। जो समय के साथ घटता और बढ़ता रहता है।

तीन प्रकार की वैरायटियाँ हैं
प्रसिद्ध दालमोठ जो है खट्टा मसाला, मूंग की दाल, काजू बादाम, टेस्टी, आलू के सेब, खट्टा मीठा, नवरत्न, सेम का बीज, काजू, पिंट्स, मूंग दाना, हींग दाना, हींग मक्का का सेव, पंजाबी तड़का, पनीर भुजिया आलू भुजिया बेसन भुजिया समोसा, मिनी मक्का चना, चना जोर, गठिया पापड़ी, मठरी, मैदा, किशमिश, वाकड वाडी, केला चिप्स आदि अनाज हैं।

वर्षों पुराना है यहाँ का चौथा भाग
फर्रुखाबाद में वर्ष का इतिहास 200 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां के लोग बताते हैं कि यह बिजनेस स्थानीय लोगों को रोजगार भी देता है। साथ ही साथ भी अच्छे नमूने हो जाते हैं। यहां से पहुंच वाली वैली जिलों के साथ-साथ प्रदेश और डिस्ट्रिब्यूट में बनाया गया है। जिससे कि एक नए व्यापार का रास्ता भी खुल जाए, यहां-वहां, स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के साधन भी तैयार हो जाएं। मुख्य रूप से यहां की राजधानी कानपुर, नासिक, राजस्थान, जयपुर भोपाल, डिलीवरी और बनारस के साथ दिल्ली और मुंबई तक बिकती है।

विकल्प बनाने का तरीका
जायकेदार के लिए आम तौर पर स्वादिस्ट बनाने का तरीका कई घंटो तक बताया जाता है। वहीं, आपके पास शुद्ध बेसन, सरसों का तेल, रिफाइंड तैयार करने के लिए सबसे पहले बेसन में नमक और मसाले को बड़े पैमाने पर इसे तेल में तैयार करके तैयार किया गया है। इसे खाना पकाने से निकाल कर अलग-अलग रख लेते हैं। कुछ देर बाद इनबेसिन के इंस्टालिया को बंद कर दिया गया। इसमें जिस प्रकार का स्वाद, फ्लेवर खत्म होता है। इसी हिसाब से इसमें हींग, लेम्बोर्गन, सैटलाइट चला और मूंग और मूंगफली के साथ ही भुंजिया आदि के नाश्ते को तैयार किया जाता है।

टैग: भोजन 18, स्थानीय18



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