निःसंदेह बड़कुल, दमोह:मध्यप्रदेश के दमोह जिले में मीठे पकवानों के कस्टम त्योहारों की अत्यधिक कमी है। यही कारण है कि शहर के घंटाघर पर नई वैराइटी की मिठाइयां से बाजार चमक उठा है। ग्रामीण इलाकों के लोग हो या शहरी हमेशा कुछ न कुछ नए की तलाश में अक्सर आते रहते हैं। आजकल दमोह की मशहूर मिठाई कलाकंद और खोवे की जलेबी की खरीदारी के लिए लोग दुकान के बाहर घंटो लाइन लगा रहे हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि पूरे जिले में करीब 90 पालतू जानवर पालते हैं, क्योंकि हर घर में एक से दो पालतू जानवर पालते हैं। जिस घर से घर में तैयार होने वाला शुद्ध घी और मावा सीधा-सीधा तैयार होता है, वहां तक पंहुचता है। जहां बनने वाले से अलग वैराइटी की मिठाइयों के स्वाद में मसाला छिपा होता है।
रंग बिरंगी मिठाइयों से सजा शहर का बाजार
शहर के हर स्ट्रीट नुक्कड़ पर आकर्षक रंगबिरंगी मिठाइयों की दुकान सजी हुई है। मिठाई वाली महिला प्रतिभा बेगम ने बताया कि मेरा बचपन का आदर्श घंटाघर की स्ट्रीट में बीता है। जहां सजी मिठाइयों की सुंदरता का एक अलग ही स्वाद होता है। लक्ष्मी जी के लिए खोबा, लड्डू, जलेबी और बर्फी जैसी सभी मिठाइयों का भोग लगाना दिलचस्प है।
डेकोरेशन की दुकान वाले दिग्गज ने बताया कि आंचल में तैयार होने वाला शुद्ध मावा मिठाइयों का स्वाद बढ़ा देता है. इसे पहाड़ी खोवा भी कहा जाता है. खासकर दीपावली में खोवे की जलेबी की सजावट काफी रहती है। खोवा होने के कारण स्थानीय मिठाइयों के दाम काफी कम होते हैं। 200 से 250 रुपये प्रति किल्स के अकाउंट से मिठाइयाँ हमारी दुकान पर उपलब्ध है। इसकी मांग बेहद जोरों पर है.
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पहले प्रकाशित : 11 नवंबर, 2023, 19:31 IST
