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ब्लड बैंक में खराबी वाले खून से…बच हो सकता है 40 बच्चों की जान, डीएम ने सबसे पहले दी यह मशीन


मोहन प्रकाश/सुपौल। अब जल्द ही ब्लड बैंक से थैलेसीमिया के बच्चों को चढाने के लिए छोटे बैग में खून मिलेगा। इसके लिए सुपौल शिक्षकों के निर्देश पर सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा है। इस बैग के ब्लड बैंक में पहुंच के बाद बच्चों के लिए अलग से छोटे बैग में ब्लड पैक किया जाएगा। इसके लिए ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता है. छोटे बैग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस मशीन की भी आपूर्ति जल्द की जाएगी। यह जानकारी सिविल सर्जन डॉक्टर ललन कुमार ने दी।

सीएस ने बताया कि ब्लड बैंक में जो भी डाटा शेयर करते हैं, उनके 300 हेल्थकेयर ब्लड 350 पैकेज के बैग में खून लिया जाता है। इसमें शत्रुतापूर्ण समूह सहित अन्य तत्व पहले से मौजूद होते हैं। इन सब को कुल मिलाकर यह ब्लड साढ़े तीन सौ मिल जाता है। जिले के थैलेसीमिया रोग से पीड़ित दस साल तक के बच्चों को हर माह सौ भिक्षु रक्त नियमित रूप से चढाना होता है।

250 मिज़ाज ख़ून टूट गए
बताया गया कि 100 एसयूवी के बैग और बड़े बैग में सुरक्षित तरीके से ब्लड पैक करने के लिए ऑटोमिस्ट मशीन की आवश्यकता होती है। लेकिन ब्लड बैंक में यह दोनों उपलब्ध नहीं है। बच्चों को बड़े बैग 350 फ़ोर्स बैग की ज़रूरत पर ही आपूर्ति की जा रही है। वहीं, छोटा बैग उपलब्ध नहीं होने की वजह से प्रति बच्चा 100 खिलौने के टुकड़े के बाद बड़े बैग में बच्चा शेष 250 के टुकड़े टूट जाते हैं। इसी को देखते हुए छोटे बैग और ऑटो मशीन के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर मांग की गई है।

जनवरी में 40 बच्चे बच सकते हैं
बता दें कि जिले में वर्तमान में थैलेसीमिया रोग से 16 बच्चे पीड़ित हैं। इस खाते से हर महीने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का ब्लड उपलब्ध होने पर 4 लीटर ब्लड बर्न हो रहा है। इससे थैलेसीमिया के 40 पीड़ित बच्चों या 11 विस्कॉन्सिन को खून चढ़ाया जा सकता है।

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पहले प्रकाशित : 13 नवंबर, 2023, 16:14 IST



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