उत्तर
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विधान है।
पूजन के बाद लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा का नदी में विसर्जित किया जाना चाहिए।
दिवाली के बाद के लिए वास्तु टिप्स: दीयों का महापर्व इसबार 12 नवंबर को रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दिन मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा का विधान है। यही कारण है कि लोग लक्ष्मी-गणेश की नई तस्वीर या प्रतिमा खरीदकर लाते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। इसके बाद उन कारीगरों को लोग कहीं भी पकड़ कर रखते हैं। लेकिन ऐसा करना गलत है. इससे आपको बड़ा नुकसान हो सकता है. घर से मां लक्ष्मी बन सकती हैं, जिससे आप भी धन संकट में पड़ सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा कैसे करें? किन उपायों से होगा फायदा? परहेज़ करने का कौन सा उपाय करना चाहिए? इस दस्तावेज़ के बारे में विस्तार से बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री–
गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति के बाद
पूजाघर में स्थापित करें: ज्योयोतिषाचार्य के अनुसार, गणेश-लक्ष्ममी की नई मूर्तियां आने के बाद एक कपड़े पर कपड़ा रखकर उनकी पूजा की जानी चाहिए। हालाँकि, पुरानी कलाकृतियाँ पूजा वाले वर्म पर ही रहती हैं। भाई दूज के बाद नई आतिशबाजी से दुकान हटाएं। इसके बाद पुरानी कलाकृतियों की ओर मुंह करके और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। इसके बाद पुराने कारीगरों की रोली अक्षत, खिल-बताशे, पुश हैशटैग, मि कारीगरों की रोली चढ़ाकर पूजा करें। आरती करें, इसके बाद नई मूर्ति को वहां रख दें और पुरानी मूर्ति को पूजा के स्थान से हटा दें।
नदी में दर्शन करें: पूजन के बाद आप लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति का भी नदी में दर्शन कर सकते हैं। किसी भी धातु की मूर्ति को यदि लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति माना जाए तो उसे लाल वस्त्रों में लपेटकर नदी में विसर्जित करना चाहिए। यदि आप भी ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो उदाहरण के तौर पर आप घर पर ही किसी शुद्ध बर्तन में जल संरचना वाले सामान को जला सकते हैं। ऐसा करने से आप पाप के साथी नहीं होंगे. साथ ही जीवन में लाभ मिलता है। हालाँकि, ध्यान रखें कि ताले यहाँ-वहाँ न रहें और न ही गैलरी पानी या गैलरी स्थान पर जाएँ।
सोने-आश्रम की मूर्ति को नारियल में रखें: अगर आप इस पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति चांदी, सोने या मोती की मूर्ति रखते हैं तो आप इसे घर में रख सकते हैं। हालाँकि, पुरातात्विक अभिलेख में पहले मूर्ति को गंगाजल से स्नान स्नान कराया गया था। इसके बाद पुनः आरंभ करें मंदिर या नारियल में स्थापित करें। ध्यान रहे कि इस दौरान विधि-विधान से पूजन के साथ आरती भी जरूर करें। ऐसा करने से आपको मिलेगा पूजा का लाभ. माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद और आशीर्वाद का आशीर्वाद।
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इस काम को करने से बचें: पूजन के बाद कई लोग लक्ष्मी-गणेश की माला को पेड़ के नीचे रख देते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बिल्कुल गलत कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति के पेड़ के नीचे कई चित्र अंकित किये जा सकते हैं। माँ लक्ष्मी के घर से मुख फेर लेंगे। इसके साथ ही आपकी पूजा निष्फल हो सकती है।
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विसर्जन कब करें: ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार 12 नवंबर दिन रविवार को था। वहीं, 13 नवंबर दिन सोमवार को सोमवती भी है, जो अत्यंत शुभ दिन है। इसी दिन लक्ष्मी-गणेश की प्राचीन प्रतिमा का विसर्जन अधिक फलोदय रहेगा। अगर 13 नवंबर को प्रतिमा का विसर्जन किन्हीं अवशेषों से भी नहीं किया जा सके तो फिर 15 नवंबर को विसर्जन करें। क्योंकि 14 नवंबर को मंगलवार को इस दिन विसर्जन की मनाही होती है। इसके साथ ही गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की प्राचीन मूर्ति का विसर्जन सुबह के समय ही करना चाहिए। सूर्यदेव के बाद भूलकर भी विसर्जन न करें। क्योंकि मां लक्ष्मी को प्रदोष काल और गोधुली बेला अति प्रिय है।
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पहले प्रकाशित : 14 नवंबर, 2023, 02:31 IST
