
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो सम्राट (फाला)
अमेरिका-चीन सम्मेलन के बाद अचानक तिब्बती मुद्दे ने भी जोर पकड़ लिया। हालाँकि कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो कि सम्राट और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिघ की बीच बैठक में तिब्बत का मामला शामिल नहीं था। मगर अब तिब्बती मामले पर एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने अमेरिका से चीन पर दबाव बनाने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तिब्बती मुद्दे का समाधान निकालने के लिए पूर्व के वादे को भी याद किया जाता है।
संगठन ने बिडेन से अपील की है कि वह तिब्बती लोगों के निर्देशन से चीन पर दबाव डालने के लिए सीधी बातचीत करें। ‘इंटर नेशनल आर्टिस्ट फॉर तिब्बत’ ने एक बयान में कहा, ”शी और बाइडन के बीच की बैठक में इस बार चीन के नेताओं का तिब्बत पर नियंत्रण है, जिसमें तिब्बती क्षेत्र में दमनकारी और तिब्बती लोगों पर उनका गंभीर प्रभाव शामिल है।” ।। ये चिंताएं सीधे तौर पर राष्ट्रपति शी के साथ उठना बेहद जरूरी है।
उइगर और अन्य कंपनियों को अपनी बात कहने की आजादी नहीं
संगठन ने कहा कि तिब्बती, उइगर और कई अन्य बहुउद्देश्यीय कंपनियों के लोग भी इसमें शामिल हैं, वे अपने अध्ययन के बारे में बात करें और चीन की सरकार से उन्हें आजादी की मांग करना उचित नहीं है। शी और उनके अधिकारियों को इन आवाजों में भी शामिल होना चाहिए। प्रशासन के पास मसप्रेस बनाने का मौका है।” बयान में कहा गया, ”राष्ट्रपति बिडेन को बीजिंग पर तिब्बती लोगों के साथ बातचीत का मौका मिला। दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने 2020 के अपने अभियान के दौरान वादा किया था।” हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से बैठक के संबंध में जारी एक बयान में कहा गया था कि बिडेन ने कैलिफोर्निया के वुडसाइड में शी के साथ बैठक में तिब्बत का दौरा किया था। था. (भाषा)
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