लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा: आस्था और उपवास का छठ पर्व बिहार का प्रमुख त्योहार है, जो आज से शुरू हो रहा है। जांजगीर चांपा जिले में रहने वाले बिहार के लोग चांपा के हसदेव में बने छठ घाट में छठ पूजा के हजारों की संख्या में नदी की पूजा करते हैं। छठ पर्व में सूर्य देव और छठी माता की पूजा की जाती है। इस पूजा में अस्त होते सूर्य और उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। छठ पर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है, इसके बाद खरना होता है। खरना के बाद अगले दिन व्रत रहने के बाद शाम को अर्घ्य दिया जाता है।
सुरन्द्र सिंह ने बताया कि चांपा हसदेव नदी केरा झरिया के पास छठ घाट का निर्माण भोजपुरी समाज द्वारा 2009 में कराया गया था। तभी से समाज के सभी लोग जो इधर-उधर पूजा करते थे। अब एक साथ इस घाट में होती है पूजा, इस साल 31 अक्टूबर से चल रहा है घाट की सफाई अभियान. 19 तारीख को बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष 07 से 10 हजार तक की संख्या में जो यूपी, बिहार के लोग यहां रहते हैं, वो यहां इस घाट पर पूजा करने आते हैं।
नहाय खाय से पूजा प्रारंभ
शिवशंकर झा ने सबसे पहले लोकल 18 की टीम को छठ पूजा की बधाई दी और बताया कि छठ पूजा महाभारत काल दुर्योधन के समय से चली आ रही है। इसमें भगवान सूर्य देव की पूजा होती है। नहाय खाय से पूजा शुरू होती है उसके व्रती लोग स्नान करके पूजा करते हैं। उसके अगले दिन खरना होते हैं इस दिन भगवान का व्रत होता है और शाम को व्रत रखा जाता है। फिर अगले दिन 19 नवंबर को हसदेव में छठ घाट पर छठ माता के पूजन के साथ ही साध्य के समय महिलाएं अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देंगी।और 20 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद निर्जला व्रत का पारायण कर व्रत रखा जाएगा और भक्तों को प्रसाद मनाया जाएगा।
छठ पूजा की समान सामग्री
सुपा, लोटा, थाली, दूध, जल, नया कपड़ा, बड़ा दीया, बांस, नारियल, रेजोल्यूशन, शकरकंद, हल्दी, अदरक, पेट्रोलियम जेली, शहद, पान, पूजा सुपारी, कपूर, चंदन, मिठाई, कलावा आदि।
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पहले प्रकाशित : 17 नवंबर, 2023, 17:15 IST
