मनीषी/भरतपुर. बर्फीली चट्टानों में जूनून के ऑफिस में सिंघाड़े की झील देखने को मिल रही है। फल और सब्जी मंडी की कीमतें और ठेलों पर अनोखी आकृति वाले पेड़ों की भारी ताडत दिखाई दे रही है, जिसमें सिंघाड़ा अग्रणी है। डेट के सीजन में यह अन्नदाता काफी पसंद किया जा रहा है और इसकी चर्चा बाजार में हो रही है। बता दें कि सिंघाड़ा जूना के प्रसिद्ध बांध बांध बरैठा के पानी में सबसे अधिक मात्रा में पैदा होती है, जिससे इसकी खेती में वृद्धि हो रही है। यह फल स्वास्थ्य के लिए भी जाना जाता है और लोगों के बीच इसका प्रचुर उपभोग हो रहा है। इससे स्थानीय किसानों को अच्छा प्रदर्शन हो रहा है और शहरी लोगों को स्वस्थ और स्वादिष्ट फलों का आनंद लेने का अवसर मिल रहा है।
इस अजीब हिस्से वाले फल के खेत भी अजीब हैं, जो तीन से पांच फीट पानी से भरी भूमि में स्थित हैं। इनमें बांध बरैठा के अलावा बाकी जमीन में भी सिंघाड़ा की खेती की जाती है, जिसे डहर का क्षेत्र कहा जाता है। किसान इस दस्तावेज़ से निश्चित उपकरण को तैयार करने के लिए पहले से ही काफी सुबह से लगातार कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हें पानी से अंतिम जालनुमा टॉप के लिए तैयार करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद, उन्हें यह जालनुमा फ्लैट में बेचने के लिए लाया गया है।
सिंघाडे को कई इनसाइट से उपयोग में लाया जाता है, जैसे कि इसे रॉ फल की तरह खेला जाता है और पाक जाने के बाद इसका मैक आचार्य भी बनाया जाता है। पाक जाने के बाद, कुकड़े, पूरी, और अन्य विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उपयोग किया जाता है।
डॉक्टर राम कुमार गुप्ता के अनुसार सिंघाड़ा शरीर के लिए काफी चमत्कारी होता है और इसे एक रामबाण उपचार के रूप में भी जाना जाता है। सिंघाड़ा खाने से शरीर में खनिज पदार्थों की कमी पूरी हो जाती है, क्योंकि इसमें बहुत सारे खनिज पाए जाते हैं। इसमें बहुत अधिक होता है, जो शरीर के लिए उपयुक्त होता है। सिंघाड़ा विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत भी है और इसमें विटामिन सी भी शामिल है, जिससे वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके सेवन एफ़एफ़ को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सिंघाड़ा रक्तचाप, शुगर और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
.
टैग: भरतपुर समाचार, स्वास्थ्य, ताज़ा हिन्दी समाचार, स्थानीय18, राजस्थान समाचार
पहले प्रकाशित : 20 नवंबर, 2023, 06:31 IST
