उत्तर
गाजर का सेवन देखने से स्मारक भंडार में मदद मिलती है।
गाजर खाने से आपको नैचुरल इंटेक कमाना आसान हो जाएगा।
गाजर के स्वास्थ्य लाभ: डेट का मौसम धीरे-धीरे-धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा है। इस सीज़न में उन गोलियों की भरमार हो जाती है, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी है। ऐसी ही एक गाजर (Carrot) भी है. यह सब्जी विटामिन से भरपूर है, इसे आंखों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। यह त्वचा की चमक भी बढ़ाए रहती है। अगर आपको कोई चिंता है तो आप उससे सवाल पूछ सकते हैं। गाजर उन डाउनलोड में से एक है, जिसे कच्चा और पकाकर दोनों प्रकार से खरीदा जा सकता है।
केक के रूप में तो ये बेहद काम का है तो सब्जी के अलावा गाजर का हलवा भी पूरे भारत में काफी नाम आ रहा है. यह आचार्य के भी काम आता है तो इसकी मिठाइयाँ भी उपलब्ध हैं। काली गाजर से बनी कांजी को तो पेट के लिए रामबाण माना जाता है। फेट न के बराबर होता है, लेकिन इसमें मितव्ययीता होती है। खाद्य सामग्री का मानना है कि इसमें नियमित सेवन शरीर को कई चुनौती से उबारना शामिल है। गाजर की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं.
1. लेखक एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिस्वाजीत चौधरी के अनुसार गाजर में कैलोरी कम होती है। इसमें कोलेस्ट्रॉल, मैग्नीशियम, पोटेशियम, लौह, पोटेशियम, पोटेशियम के अलावा विटामिन ए और विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों को चमत्कारी होने से रोकता है, रतिना व लैंस की रक्षा करता है। गाजर के नियमित सेवन से लंबी उम्र तक आंखों की रोशनी बनी रहती है।
2. फ़ार्चुअल वैशेषिक कंसल्टेंट ब्लूंजना सिंह के अनुसार गाजर में कैरोटीनॉयड (एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट) के रूप में पाया जाता है, जिसे त्वचा के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। खास बात यह है कि छोटे-मोटे मसालों में भी यही बात है, जो उसे ठीक कर उसकी जगह पर नई सिलाई का निर्माण कराता है। गाजर में मौजूद कैरोटीन इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करने में सक्षम है, जो स्किन का ग्लो भी कायम रखता है। ऐसा भी माना जाता है कि अगर त्वचा में दाग या दाग लग जाए तो गाजर का नियमित सेवन इनका कम कर देता है।
3. गाजर का नियमित सेवन वजन अनुपात में सहायक है। उसका कारण यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से अधिक संरचनाएं हैं और कैलोरी काफी कम है। इसमें असमान्य भी बहुत होता है लेकिन मोटापा न के बराबर होता है। इसका फायदा यह रहता है कि जब गाजर खाएंगे तो शरीर देर तक भरा-भरा महसूस होगा। परिणाम: आप भोजन का सेवन कम करें। ये सिस्टम वजन को रोकने में प्रभावशाली काम करता है। विशेष रूप से यह है कि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर को अत्यधिक ऊर्जा देने वाली बात देते हैं जो उसके लिए जरूरी है।
4. ऐसा भी माना जाता है कि गाजर का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। जिन लोगों की शिकायत होती है, उनके शरीर में विटामिन ए कम होता है। गाजर उसका पशुचिकित्सक होता है। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि गाजर में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है और इसके सेवन से ब्लड शुगर वाले लोगों को ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। गाजर में प्राकृतिक रूप से शुगर की मात्रा भी कम होती है, जो शुगर वाले के लिए है।
5. ऐसा भी माना जाता है कि गाजर के फल का नियमित सेवन बीपी को भी नियंत्रित करता है। इसका कारण यह है कि इसमें विटामिन सी, स्ट्रेंथ, नाइट्रेट और विटामिन सी सहित पोषक तत्व बीपी को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। गाजर में गाजर भी मौजूद हैं जो डी.एस.एम.जी. में मौजूद हैं।
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दिलचस्प है गाजर का इतिहास
गाजर हज़ारों वर्षों से भारत में ओबै और पका जा रही है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में गाजर (गर्जनक) के गुणों का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि यह वात और कफ का शमन करता है। एक अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘राज निघंटु’ में गाजर को मीठा करने वाली, रुचि बढ़ाने वाली, पेट फूलने या एसिडिटी दूर करने वाली, कृमि खींचने वाली, जलन-दर्द से पित्त और प्यास से राहत दिलाने वाली बताई गई है। फिश हिस्टोरिन की उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि इसका उत्पत्ति केंद्र मध्य एशियाई केंद्र है, जिसमें उत्तर पश्चिमी भारत के अलावा ईरान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान आते हैं। भारत के वनस्पति विज्ञान तो यह भी कहते हैं कि गाजर की मूल उत्पत्ति स्थल पंजाब और कश्मीर की पहाड़ियाँ हैं।
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पहले प्रकाशित : 20 नवंबर, 2023, 16:00 IST
