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हाड़ौती में लहसुन की बंपर फ़सल
भावों को देखने वाले किसानों के चेहरे चमकाते हैं
पिछली बार लहसुन ने तोड़ दी थी किसानों की कमर
कोटा. हाड़ौती का सफेद सोना कहे जाने वाले लहसुन के दाम कोटा में डूबे हुए हैं। एशिया की प्रसिद्ध भामाशाह मंडी में लहसुन के दाम 21000 प्रति औंस तक पहुंच गए हैं। इससे पहले लहसुन 4000 से 18000 रुपये प्रति लीटर तक ही बिक रहा था। लहसुन के दाम बढ़ने से किसानों की आंखों में चमक लौट आई है। पिछले कुछ दिनों में ही लहसुन के दाम 1500 रुपये प्रति औंस तक बढ़ गए हैं। पिछले 1 महीने में कान्सिलियन लहसुन के गहनों का आकलन किया जा रहा है।
के बाद लहसुन में अचानक उछाल आने से किसान के चेहरे खिले हुए हैं। लहसुन के थोक में एक सप्ताह के भीतर लहसुन का खुदरा मूल्य 210 रुपये प्रति किलों के करीब पहुंच गया है। कोटा की मंडी में रोजाना करीब 5000 कट्टे लहसुन आ रहा है। जबकि एशिया की प्रसिद्ध भामाशाह मंडी में 50000 कट्टों तक की आवक लगी है। लहसुन के बढ़ते भावों को देखकर किसान अब लग रहे हैं कि उन्हें उनकी कीमत के साथ दावा भी मिल जाएगा।

साल भर किसानों को नहीं मिले थे लहसुन के भाव
लहसुन के खूबसूरत आभूषणों ने इसके उत्पादक किसानों के कमर को तोड़ दिया था। इससे निराश और निराश किसानों ने लहसुन को मंडी में बेचने के बजाय उसे गोदाम में फेंक दिया। ये हो गए थे दाम 200 से ₹300 किलो बाइक वाला लहसुन उस समय 20 से 30 किलो तक भी नहीं बिका था। जबकि गैट बार हाड़ौती में करीब एक लाख हेक्टेयर में लहसुन की कटाई की गई थी और 6 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक का उत्पादन हुआ था।
कोरोना काल में लहसुन की खेती का क्रेज बढ़ गया
चीन और भारत में तनाव आने के बाद वहां से लहसुन का अपहरण हो गया। वहीं कोरोना काल में लहसुन को इम्युनिटी बूस्टर ने माना कि इसकी खेती के प्रति लोगों में क्रेज बढ़ गया था। किसानों ने इसे मुफीद मानते हुए दूसरी लहर से ध्यान इस पर फोकस किया था। इसके बाद उनका लहसुन का प्रोडक्शन भी बंपर हो गया। लेकिन दाम न मिलने से किसानों को खून के आंसू फूट पड़े। लेकिन इस बार हालात जुदा है. लहसुन की बंपर सफलता और इसका भाव देखना किसान के आनंद का विचार नहीं है।
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टैग: कृषि, किसान, कोटा समाचार, राजस्थान समाचार
पहले प्रकाशित : 20 नवंबर, 2023, 16:10 IST
