वरिष्ठ मिश्रा/खंडवा.भारत में कचौड़ी खाने के शौकीनों की संख्या काफी ज्यादा है. अज्ञात का नाम दर्ज ही हमें एक बार कचौड़ी की याद जरूर आती है। आज हम जिसकी कचौड़ी बना रहे हैं वो देखने में बाकी बात कचौड़ी जैसी है, लेकिन आकार में छोटी और स्वाद में बेहद अनोखी है और स्वास्थ्य के लिए अन्य कचौड़ी से भी बढ़िया है। जो खंडवा में बालाजी नासिका केंद्र पर स्थित है। यह दुकान करीब 15 साल पुरानी है। लेकिन आज भी उनका टेस्ट शहर के लोगों के बीच हुआ है, शहर में एक अमीर हिंग की कचौरी मिलने की दुकान में होने के कारण लोग उन्हें बड़े चाव से खाते हैं।
महान कलाकार श्याम पटेल ने बताया कि हम 15 साल से हींग की कचौड़ी बना रहे हैं। यह खंडवा आसपास के क्षेत्र में मामाजी की कचौड़ी के नाम से प्रसिद्ध है। इसके टेस्ट की मुख्य वजह यह है कि इसका अन्य कचौड़ी का स्वाद अनोखा है। बाकी रेसिपी इसका रहस्य है. शहर में एक दुकान की वजह से लोग भी इसका बड़ा स्वाद ले रहे हैं। आलू की कचौड़ी, मूंग की कचौड़ी, प्याज की कचौड़ी और भी कई प्रकार की कचौड़ियों के नाम सुनते हैं।
10 दिन तक बुरा नहीं होता
श्याम पटेल ने कहा, कि हींग खाने के कारण यह कचौरी 10 दिन तक खराब नहीं होती और स्वास्थ्य के लिए नुकसान भी नहीं है। इस वजह से ग्राहक अपने साथ साड़ी भी ले जाते हैं और घर में रहते हैं। यात्रा में पेटपूजा के लिए यह लोगों की पहली पसंद है, इसलिए वे घूमने में भी साथ रहते हैं।
.
पहले प्रकाशित : 23 नवंबर, 2023, 12:50 IST
